संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने का लक्ष्य : सत्यनारायण भट्ट

संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने का लक्ष्य : सत्यनारायण भट्ट

रामगढ़. संस्कृत भारती के अखिल भारतीय राष्ट्रीय महामंत्री सत्यनारायण भट्ट ने कहा कि देशभर के 40 प्रांतों में संगठन के प्रशिक्षण एवं सत्र कार्यक्रम चल रहे हैं. वर्तमान में झारखंड के रामगढ़ और बिहार के बेतिया में क्रमशः सात दिवसीय और 12 दिवसीय प्रवास सत्र आयोजित किये जा रहे हैं. वह रामगढ़ स्थित राधा गोविंद पब्लिक स्कूल में चल रहे सात दिवसीय शिविर में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. उन्होंने बताया कि संस्कृत भारती की स्थापना वर्ष 1981 में बेंगलुरु में हुई थी. वह पिछले 35 वर्षों से संगठन से जुड़े हुए हैं. पिछले पांच वर्षों से राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में कार्यरत हैं. भट्ट ने कहा कि संस्कृत भारत की प्राचीन एवं जीवन मूल्यों से जुड़ी भाषा है. संगठन का उद्देश्य इसे संस्कार और संस्कृति के संवर्धन के लिए जन-जन तक पहुंचाना है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में संगठन के लगभग 25,000 कार्यकर्ता सक्रिय हैं. इनमें से 7,500 को विभिन्न दायित्व सौंपे गये हैं. कहा कि देश में पांच संस्कृत गांव विकसित किये गये हैं. यहां संस्कृत को बोलचाल की भाषा के रूप में अपनाया जा रहा है. लगभग 10,000 घरों में संस्कृत संभाषण को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस अवसर पर प्रांत उपाध्यक्ष दीपचंद राम कश्यप, प्रांत मंत्री पृत्थीराज सिंह एवं डॉ सुनील कुमार कश्यप उपस्थित थे.

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Author: SAROJ TIWARY

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