रामगढ़. दसलक्षण महापर्व के दूसरे दिन श्री दिगम्बर जैन मंदिर रामगढ़ में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ उत्तम मार्दव धर्म की पूजा-अर्चना की. गुरुवार को सुबह से ही जिनालय में दर्शन, अभिषेक और शांतिधारा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही.
अभिषेक व शांतिधारा में श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा
मंदिर परिसर में वेदियों और प्रतिमाओं का विधि-विधान से अभिषेक एवं शांतिधारा कराया गया. नेमिनाथ भगवान (पाण्डुशिला, अष्टधातु प्रतिमा) का कलश अभिषेक श्री विद्या प्रकाश एवं पदम चंद छाबड़ा परिवार ने किया. पाण्डुशिला शांतिधारा का पुण्यार्जन श्री हरक चंद, नम्रता, विवेक, विकास, सम्यक एवं शाश्वत अजमेरा परिवार को प्राप्त हुआ.
तीनों वेदियों की बड़ी प्रतिमाओं का कलश अभिषेक रमेश, विकास एवं अमित सेठी परिवार, अरुणा एवं डॉ शरद जैन परिवार तथा अशोक, प्रेम, अमित एवं आरव काला परिवार ने किया.
चंद्रप्रभु भगवान की प्राचीन प्रतिमा का अभिषेक इंद्रमणि देवी चूड़ीवाल परिवार ने किया. महावीर भगवान की प्राचीन प्रतिमा का अभिषेक राकेश पांड्या के पौत्र शौर्य पांड्या के जन्मदिन के उपलक्ष्य में समस्त पांड्या परिवार ने किया. पारसनाथ भगवान की शांतिधारा का पुण्यार्जन महिपाल, अशोक, सुनील एवं संजय सेठी परिवार को प्राप्त हुआ.
मुनिसंघ के सान्निध्य में हुआ मंगल प्रवचन
मुनिसंघ के सान्निध्य में महाराज श्री ने उत्तम मार्दव धर्म का महत्व बताया. उन्होंने कहा कि मार्दव का वास्तविक अर्थ मन में विनम्रता धारण करना और मान, मद एवं अहंकार का त्याग करना है. अहंकार आत्मा को बंधनों में बांधता है, जबकि विनम्रता मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करती है.
उन्होंने प्रेरणा दी कि धर्म केवल पूजा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि व्यवहार और आचरण में भी विनम्रता दिखाई दे. प्रवचन के दौरान मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया.
रांची रोड जिनालय में भी हुआ आयोजन
रांची रोड स्थित 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में भी दसलक्षण महापर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया. यहां प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा का पुण्यार्जन श्री राजीव जैन (रांची रोड) को प्राप्त हुआ. दिनभर दोनों जिनालयों में पूजा, भक्ति संगीत और धार्मिक अनुष्ठान चलते रहे. यह जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी श्रवण जैन ने दी.