फ्लाई ऐश को संसाधन बनाकर सतत विकास की दिशा में बढ़ रहा पीवीयूएनएल

रांची में आयोजित द्वितीय ऐश यूज़र मीट-2026 में पीवीयूएनएल ने फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक उपयोग और सतत विकास की दिशा में नई तकनीकों पर चर्चा की।

पतरातू : पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) की ओर से शनिवार को रांची में द्वितीय ऐश यूज़र मीट-2026 का आयोजन किया गया. अपशिष्ट से समृद्धि तक परिवर्तन की सशक्त एवं सतत यात्रा विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक, औद्योगिक व पर्यावरणीय उपयोग पर व्यापक चर्चा हुई. कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत, शिक्षण व अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधियों तथा फ्लाई ऐश उपयोगकर्ताओं ने भाग लिया.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग तथा कृषि, पशुपालन व सहकारिता विभाग के सचिव अबूबक्कर सिद्दीक पी, विशिष्ट अतिथि के रूप में आईएएस अतिरिक्त सचिव जल संसाधन विभाग ताराचंद उपस्थित थे.

पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एके सहगल ने सभी अतिथियों का शॉल व पौधा भेंट कर स्वागत किया. सम्मेलन में राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) समिति के अध्यक्ष एवं हुडको के पूर्व अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक वी सुरेश, भवन निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख संजय कुजूर, ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंता प्रमुख मनोहर कुमार, सीपीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता मोहन लाल, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के उपनिदेशक डॉ एसके दास, क्षेत्रीय खान नियंत्रक संदीप सिंह, धनबाद रेल मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक मुकेश कुमार, आईसीएआर-आईएआरआई झारखंड के एसके महापात्र एवं विशाल नाथ, पीवीयूएनएल के मुख्य महाप्रबंधक (प्रचालन व अनुरक्षण) मनीष खेतरपाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे.

उद्घाटन सत्र में पीवीयूएनएल की उपलब्धियों एवं सतत ऐश उपयोग से जुड़ी पहलों पर आधारित विशेष स्मारिका का विमोचन किया गया. पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ सभी अतिथियों को फ्लाई ऐश से निर्मित स्मृति-चिह्न भेंट किए गए. मुख्य कार्यकारी अधिकारी एके सहगल ने कहा कि फ्लाई ऐश को अब अपशिष्ट नहीं, बल्कि देश के लिए एक बहुमूल्य संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए.

उन्होंने बताया कि पीवीयूएनएल ऐश टू एसेट की अवधारणा को साकार करने के लिए ड्राई बॉटम ऐश हैंडलिंग सिस्टम, एयर-कूल्ड कंडेंसर (एसीसी) तकनीक, जल संरक्षण तथा फ्लाई ऐश के अधिकतम उपयोग जैसी पहलें कर रहा है. स्वयं सहायता समूहों को फ्लाई ऐश से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देकर रोजगार व आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. तकनीकी सत्र की अध्यक्षता वी सुरेश ने की इस दौरान सीएसआईआर सीआईएम एफआर के आर एभिन मस्तो ने फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक उपयोग पर प्रकाश डाला.

वहीं एनपीजीसी की वरिष्ठ प्रबंधक अपूर्व प्रकाश ने कार्बन मार्केट विषय पर प्रस्तुति देते हुए कार्बन उत्सर्जन में कमी और नए आर्थिक अवसरों की संभावनाओं की जानकारी दी. आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के विशेषज्ञों ने भी फ्लाई ऐश के उपयोग पर तकनीकी प्रस्तुति दी.

सम्मेलन में फ्लाई ऐश के अधिकतम उपयोग, पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकों, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने तथा सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों व उद्योग जगत के बीच समन्वय मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया. कार्यक्रम का समापन हरित, स्वच्छ एवं सतत भविष्य के निर्माण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ.


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