कुजू से धनेश्वर प्रसाद और प्रदीप यादव की रिपोर्ट
कुजू (रामगढ़). बारिश का मौसम खत्म हो गया है. अब ग्रामीण इलाकों में कांस के फूल खिल गये हैं. खेतों की मेड़, नदी-नालों के किनारे और खाली पड़ी जमीन पर लहराते सफेद कांस के फूल इन दिनों प्रकृति की खूबसूरती बढ़ा रहे हैं.
दूर तक फैले कांस के फूलों को देखकर ऐसा लगता है, जैसे धरती ने सफेद चादर ओढ़ ली हो. हल्की हवा के झोंकों के साथ झूमते कांस के फूलों का नजारा लोगों को शांति और सुकून दे रहा है.
मोबाइल कैमरे में कैद कर रहे प्राकृतिक नजारा
सुबह-शाम इन फूलों के बीच से गुजरना लोगों को आकर्षित कर रहा है. युवा और बच्चे भी इस प्राकृतिक नजारे को अपने मोबाइल कैमरे में कैद करते नजर आ रहे हैं.
10 साल की रिया कहती है, "मुझे ये फूल बहुत पसंद हैं. ऐसा लगता है जैसे कोई परी आई हो."
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मौसम बदलने और त्योहारों की आहट
लोगों का कहना है कि कांस के फूलों का खिलना मौसम में बदलाव और आने वाले त्योहारों की आहट का संकेत है. झारखंड की संस्कृति में प्रकृति और पर्व-त्योहारों का गहरा संबंध है. कांस के फूल भी इसी प्राकृतिक और सांस्कृतिक परंपरा की खूबसूरत पहचान हैं.
झारखंड में करमा जैसे प्रकृति पर्वों में प्रकृति के प्रति आस्था और संरक्षण का भाव प्रमुख है. हालांकि करमा पूजा में करम डाली और जावा का विशेष महत्व है, लेकिन कांस का खिलना भी वर्षा ऋतु के समापन और शरद ऋतु के आगमन का संदेश देता है.
दुर्गापूजा से पहले बनने लगा उत्सव का माहौल
कांस के फूल न केवल प्रकृति पर्वों से जुड़े हैं, बल्कि आने वाले अन्य त्योहारों का भी संकेत देते हैं. दुर्गापूजा और शारदीय नवरात्र की आहट के बीच खिले कांस के फूल ग्रामीण इलाकों में उत्सव का माहौल बनाने लगे हैं.
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