नौकरी व मुआवजा के लिए रैयतों ने बंद कराया खदान का काम

) नौकरी व मुआवजा के लिए रैयतों ने बंद कराया खदान का काम

:::न्याय नहीं मिलने पर दी आत्मदाह की चेतावनी. उरीमारी. सौंदा बस्ती सरैया टोला के रैयत ग्रामीणों ने रविवार से सयाल डी परियोजना परियोजना के एक हिस्से का कामकाज अनिश्चितकाल के लिए ठप कर दिया. ग्रामीण सुबह छह बजे उक्त स्थल पर पहुंचे. डेरा-डंडा डाल कर बैठ गये. इसके कारण इस हिस्से से कोयला उत्पादन का काम ठप हो गया है. इस हिस्से से हाल ही में कोयला उत्पादन शुरू हुआ था. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी जमीन के बदले नौकरी व मुआवजा नहीं मिलेगा, काम करने नहीं दिया जायेगा. आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रैयत विनोद साव ने बताया कि खाता संख्या 38 व 73 नारायण तेली के वंशजों की जमीन है. इस खाते की जमीन से 1984 में तीन लोगों को नौकरी मिली थी. इसके बाद इसी खाते से 30 एकड़ रैयती व 60 एकड़ गैरमजरुआ जमीन का अधिग्रहण सीसीएल ने किया. इसकी प्रक्रिया 2020 से 2025 के बीच पूरी हुई. नौ लोगों को नौकरी मिलनी है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामले को सीसीएल मुख्यालय रांची भेजा गया था. अब बताया जा रहा है कि सीसीएल के भू-राजस्व विभाग ने इस पर रोक लगा दी है. विनोद साव ने कहा कि हमलोग मजबूर होकर आंदोलन कर रहे हैं. जब तक नौकरी-मुआवजा नहीं मिलेगा, काम शुरू नहीं होने देंगे. आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने ऐलान किया कि यदि प्रबंधन ने नौकरी-मुआवजा नहीं दिया, तो ग्रामीण आत्मदाह कर लेंगे. खेती करना पसंद करेंगे, लेकिन प्रबंधन को कोयला उत्पादन नहीं करने देंगे : ग्रामीण अपनी जमीन पर खेती-बारी करना पसंद करेंगे, लेकिन प्रबंधन को कोयला उत्पादन करने नहीं देंगे. आंदोलन में मुख्य रूप से दशरथ साव, रामप्रवेश साव, पवन साव, धनेश साव, रामसेतु प्रसाद, अशोक साव, बैजनाथ साव, विजय प्रसाद, योगेंद्र साव, विनय प्रसाद, सूरज साव, रोहित प्रसाद, बिट्टू साव, संजय साव, संतोष साव, विकास साव, विजय साव, चतुर्भुज प्रसाद, नंदलाल साव शामिल थे. दूसरी ओर, पूरे मामले पर प्रबंधन की ओर से कहा गया कि 10 एकड़ के बदले नौकरी व मुआवजा मिल चुका है. 20 एकड़ का मामला प्रक्रियाधीन है. मुख्यालय से जो भी निर्देश आयेगा, उसका पालन किया जायेगा.

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Published by: Saroj tiwary

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