सलाउद्दीन की रिपोर्ट
Jharkhand Police Association : प्रभात खबर संवाद कार्यक्रम में झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने कहा कि झारखंड में जनसंख्या के अनुपात में नए पुलिस थानों का गठन किया जाना चाहिए. समय की मांग है कि प्रत्येक अनुमंडल स्तर पर साइबर थाना स्थापित हो. उन्होंने कहा कि सब-इंस्पेक्टर (एसआई) के स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ाई जाए और लगभग रिक्त 1110 पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाए. इसके साथ ही वेतन-भत्ते में बढ़ोतरी, समय पर प्रोन्नति एवं अवार्ड और सभी रैंक में जनसंख्या के अनुपात में पद सृजित किए जाएं. उन्होंने बताया कि झारखंड में लगभग 15 हजार पुलिसकर्मी जिला बल, जैप, आईआरबी, सीआईडी, जगुआर, एटीएस समेत विभिन्न इकाइयों में कार्यरत हैं. झारखंड पुलिस एसोसिएशन की स्थापना वर्ष 1920 में हुई थी. राहुल मुर्मू 32 वर्ष की आयु में एसोसिएशन के सबसे कम उम्र के प्रदेश अध्यक्ष बने हैं. उनकी जन्मभूमि पाकुड़ और कर्मभूमि कोल्हान रही है. उन्होंने नेतरहाट से 10वीं, संत जेवियर्स कॉलेज से 12वीं और कलिंगा विश्वविद्यालय से बीटेक की पढ़ाई की है. प्रभात खबर से बातचीत में उन्होंने पुलिस एसोसिएशन के कार्य, दायित्व और चुनौतियों पर विस्तार से अपनी बात रखी.
झारखंड में बहाली, प्रोन्नति, स्थानांतरण और अवार्ड समय पर मिले
राहुल मुर्मू ने कहा कि झारखंड में वर्ष 2018 के बाद एसआई की नई बहाली नहीं हुई है. वर्तमान में 1110 स्वीकृत पद रिक्त हैं. जनसंख्या के अनुरूप पद बढ़ाकर शीघ्र बहाली की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि एसआई को अब भी छठे वेतनमान के अनुसार वेतन मिल रहा है, जबकि सातवें वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए. केंद्र सरकार आठवें वेतनमान के लिए समिति भी गठित कर चुकी है. उन्होंने बताया कि रिक्त पदों के बावजूद 35 इंस्पेक्टरों की डीएसपी पद पर प्रोन्नति लंबित है. स्थानांतरण भी नक्सल व शहरी क्षेत्रों में कार्यकाल को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए.
अनुमंडल स्तर पर बने साइबर थाना
उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या के अनुसार नए थाना खोले जाएं तथा पुराने थानों का उन्नयन किया जाए. प्रत्येक अनुमंडल में साइबर थाना स्थापित करना समय की आवश्यकता है. पुलिस पदाधिकारियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि झारखंड में नक्सलवाद काफी सीमित हो गया है, जबकि साइबर अपराध व धार्मिक उन्माद की घटनाएं बढ़ी हैं. इसलिए पुलिस बल की तैनाती और प्रशिक्षण भी वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप होना चाहिए.
पुलिस वेलफेयर पर एसोसिएशन की मांग
राहुल मुर्मू ने कहा कि सभी थाना परिसरों के आसपास पुलिस क्वार्टर बनाए जाएं. पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए स्कूलों में सीट आरक्षित हो तथा बेहतर चिकित्सा सुविधा और सभी भत्तों में बढ़ोतरी की जाए. उन्होंने कहा कि लगातार ड्यूटी और स्थानांतरण के कारण पुलिसकर्मियों पर मानसिक दबाव बढ़ता है. यदि परिवार को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तो उनका मानसिक तनाव कम होगा और कार्यक्षमता भी बढ़ेगी.
पुलिस की छवि को लेकर एसोसिएशन सजग
उन्होंने कहा कि एसोसिएशन सभी सदस्यों से अपील करता है कि वे अपने कर्तव्य और जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहें तथा वर्दी की गरिमा बनाए रखें. जनता और पुलिस के बीच विश्वास कायम रखना आवश्यक है. उन्होंने सुझाव दिया कि विधि-व्यवस्था और अनुसंधान कार्य का दायित्व अलग-अलग अधिकारियों को मिलना चाहिए. कार्य क्षमता के साथ पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है. इससे पुलिस की छवि और कार्य क्षमता दोनों बेहतर होंगी.
कम उम्र अध्यक्ष बनने में बाधा नहीं बनी
राहुल मुर्मू ने कहा कि पाकुड़ जैसे पिछड़े जिले से निकलकर उन्होंने नेतरहाट, संत जेवियर्स कॉलेज और भुवनेश्वर स्थित कलिंगा विश्वविद्यालय से बीटेक की शिक्षा प्राप्त की. वर्ष 2011 में केंद्र सरकार की ओर से डॉ. भीमराव आंबेडकर पुरस्कार के लिए झारखंड के दस चयनित युवाओं में उनका चयन हुआ था. पुलिस सेवा में आने के बाद उन्होंने आदिवासी बहुल कोल्हान क्षेत्र के बंदगांव थाना प्रभारी के रूप में कार्य किया. मानवाधिकार विषय पर पुलिस विभाग की वाद-विवाद प्रतियोगिता में दो बार प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया. उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे वह पूरी निष्ठा और क्षमता के साथ निभा रहे हैं.
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