भुरकुंडा (रामगढ़). रैयत विस्थापित मोर्चा और झारखंडी बेरोजगार संघर्ष मोर्चा द्वारा शुक्रवार से शुरू किया गया अनिश्चितकालीन आंदोलन शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा. आंदोलन के कारण भुरकुंडा के संगम खदान का कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा रहा. आंदोलनकारी ट्रांसपोर्टिंग मार्ग पर टेंट लगाकर बैठे हुए हैं. इस खदान से वर्तमान में ओबी का खनन हो रहा था, जो आंदोलन के कारण पूरी तरह बंद हो गया है. खदान में सैकड़ों हाइवा और पोकलेन मशीनें जहां-तहां खड़ी हैं.
सफल वार्ता तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
मोर्चा के नेताओं ने कहा कि शुक्रवार को प्रबंधन की तरफ से वार्ता की पहल की गई थी. जब तक सफल वार्ता नहीं होगी, हम लोग आंदोलन पर डटे रहेंगे. काफी विवश होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है. प्रबंधन लगातार हमारी मांगों को नजरअंदाज कर रहा है.
रोजगार, मुआवजा व पुनर्वास समेत कई मांगें
प्रतिनिधियों ने बताया कि हमारी मांगों में विस्थापित परिवार को रोजगार, मुआवजा व पुनर्वास, आउटसोर्सिंग कंपनी में 75 प्रतिशत रोजगार रैयत विस्थापितों को देने, लोकल सेल का संचालन विस्थापितों के जिम्मे देने, कोयला परिवहन का ठेका कार्य विस्थापितों को देने की मांग शामिल है.
लिखित आश्वासन के बाद भी रोजगार नहीं मिलने का आरोप
गौरतलब है कि यह आंदोलन देवरिया, बरगांवा, हुन्दुआ, कुरसे और बलकुदरा गांव के विस्थापितों द्वारा किया जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि 24 जुलाई को हुए पिछले आंदोलन में प्रबंधन ने रोजगार देने का लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक एक भी विस्थापित को बीएलए कंपनी में रोजगार नहीं दिया गया. इसी वादा खिलाफी के विरोध में ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है.
बड़ी संख्या में महिला-पुरुष आंदोलन में डटे
आंदोलन में मुख्य रूप से रंजीत बेसरा, वीरेंद्र मांझी, सन्नी कुमार बेसरा, शंकर मांझी, ब्रह्मदेव मुर्मू, किशुन नायक, संजय नायक, बहादुर मांझी, सुनील मुर्मू, सुदेव उरांव, बैजनाथ बेदिया, टुरका मांझी, धनीराम मांझी, राज मुर्मू, राकेश मुंडा, सुनील मुंडा, सूरज मुर्मू, रंजीत मांझी, विक्रम हेंब्रम, बबलू ठाकुर, सुरेश कुमार, पवन हेंब्रम, शक्ति हेंब्रम समेत बड़ी संख्या में महिला-पुरुष डटे हुए हैं.
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