पतरातू से अजय तिवारी की रिपोर्ट
Patratu News: झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू में इन दिनों हाई वोल्टेज बिजली तार स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गए हैं. पतरातू-रांची मुख्य मार्ग पर बावंधारा से लेकर पतरातू लेक रिसोर्ट तक सड़क किनारे लगे घने पेड़ों के बीच से गुजर रहे 33,000 केवी और 11,000 केवी के तार अब खतरे की स्थिति में पहुंच चुके हैं. पेड़ों की बढ़ी हुई डालियां सीधे इन तारों से टकरा रही हैं, जिससे मामूली हवा या बारिश में भी बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है.
बार-बार बिजली गुल होने से जनजीवन प्रभावित
स्थानीय निवासियों के अनुसार, जैसे ही तेज हवा चलती है या हल्की बारिश होती है, तुरंत बिजली कट जाती है. इसका असर पीटीपीएस कॉलोनी, कटिया, कोतो बस्ती और आसपास के इलाकों में साफ देखा जा रहा है. रोजाना बिजली की अनियमित आपूर्ति से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. छोटे दुकानदारों का व्यापार ठप पड़ रहा है, वहीं छात्रों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है.
मौसम के साथ बढ़ती परेशानी
बरसात और तेज हवा के दौरान यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है. तारों का पेड़ों से टकराना या आपस में संपर्क होना शॉर्ट सर्किट और फॉल्ट की स्थिति पैदा करता है. कई बार तो रातभर बिजली नहीं रहती, जिससे लोगों को अंधेरे में समय बिताना पड़ता है. गर्मी के मौसम में यह स्थिति और अधिक कष्टदायक हो जाती है.
लाइनमैन के लिए चुनौती
बार-बार हो रहे फॉल्ट के कारण बिजली विभाग के लाइनमैनों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. घने पेड़ों और झाड़ियों के बीच से गुजरते तारों में खराबी का सटीक स्थान ढूंढना आसान नहीं होता. कई बार घंटों की मशक्कत के बाद भी फॉल्ट का पता नहीं चल पाता, जिससे बिजली बहाली में देरी होती है.
तारों से हादसे का खतरा
यह समस्या सिर्फ बिजली बाधित होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बड़ा हादसा होने का खतरा भी बना हुआ है. हाई वोल्टेज तारों का पेड़ों से संपर्क किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है. खासकर बारिश के दौरान करंट फैलने की आशंका और बढ़ जाती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है.
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बिजली विभाग से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों ने कई बार बिजली विभाग को इस समस्या से संबंधित शिकायत भी की गई है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है. लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द पेड़ों की नियमित छंटाई कराई जाए और बिजली तारों को सुरक्षित दूरी पर व्यवस्थित किया जाए. इससे न केवल बिजली आपूर्ति सुचारू होगी, बल्कि किसी संभावित हादसे से भी बचाव किया जा सकेगा.
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