भुरकुंडा(रामगढ़). अखंड सुहाग और सुखी दांपत्य जीवन की कामना का पर्व हरितालिका तीज सोमवार, 14 सितंबर को मनाया जाएगा. पर्व को लेकर भुरकुंडा कोयलांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में सुहागिन महिलाओं में खासा उत्साह है. महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करेंगी.
सुबह 6:05 से 7:06 बजे तक शुभ मुहूर्त
पुरोहित सतेंद्र झा के अनुसार, तीज पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 6:05 से 7:06 बजे तक रहेगा. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:32 से 5:19 बजे तक रहेगा. वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से दोपहर 12:41 बजे तक है. शाम को सूर्यास्त के बाद गोधूलि बेला में भी पूजा की जा सकती है.
चूड़ी, सिंदूर और साड़ियों की बढ़ी मांग
तीज को लेकर भुरकुंडा बाजार में रौनक बढ़ गयी है. बाजारों में भीड़ बढ़ गई है और दुकानों के सामने महिलाओं की चहल-पहल दिख रही है. दुकानें रंग-बिरंगी चूड़ियों और साड़ियों से सज गई हैं. महिलाएं चूड़ी, आलता, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, साड़ी और पूजा सामग्री की खरीदारी कर रही हैं. दुकानदारों के अनुसार हरे और लाल रंग की साड़ियों की मांग अधिक है.
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शिव-पार्वती के मिलन से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया. इसी कारण हरितालिका तीज को शिव-पार्वती के मिलन और अखंड सौभाग्य का पर्व माना जाता है.
मिट्टी से बनती है शिव-पार्वती की प्रतिमा
तीज पूजन में काली गीली मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाने की परंपरा है. महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर रात्रि में पूजा, भजन-कीर्तन और कथा श्रवण करती हैं. श्रद्धा और निष्ठा से व्रत करने से अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना पूरी होने की धार्मिक मान्यता है.
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