गोला से राजकुमार की रिपोर्ट
Ramgarh (गोला): रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड के सब्जी उत्पादक किसान इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं. एक ओर बाजार में सब्जियों का उचित दाम नहीं मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने खेती की लागत बढ़ा दी है. हालात ऐसे हो गए हैं कि किसान अपनी तैयार फसल को खेत में ही नष्ट करने को मजबूर हैं. कोरांबे गांव निवासी किसान जगेश्वर महतो ने शनिवार को अपनी लहलहाती भिंडी की फसल पर हल चला दिया. उन्होंने बताया कि लगभग 50 डिसमिल जमीन में भिंडी की खेती की थी, जिसमें करीब 40 हजार रुपये खर्च हुए थे, लेकिन बाजार में भिंडी मात्र दो से तीन रुपये प्रति किलो बिक रही है. इससे उन्हें केवल 15 हजार रुपये ही मिल सके. इस प्रकार करीब 25 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ा.
लागत भी नहीं निकल पा रही
किसान जगेश्वर महतो ने कहा कि खेती में लागत तो दूर मेहनत की कीमत भी नहीं निकल पा रही है. उन्होंने बताया कि अब वे भिंडी की जगह मकई लगाने की तैयारी कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि लगातार नुकसान के कारण सब्जी खेती से मोहभंग होने लगा है.
डीजल-पेट्रोल महंगा, खेती और मुश्किल
जगेश्वर महतो ने बताया कि पिछले 10 दिनों में तीन बार डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए हैं. इसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है. ट्रैक्टर के लिए डीजल लेने में भी काफी परेशानी हो रही है. घर से 12 से 15 किलोमीटर दूर पेट्रोल पंप जाना पड़ता है और गैलन में डीजल नहीं मिलने से अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ती है.
बाजार में व्यापारी कम पहुंच रहे
किसानों का कहना है कि ईंधन महंगा होने के बाद से गोला डेली मार्केट में बाहर से आने वाले व्यापारी भी कम पहुंच रहे हैं. इस कारण किसानों को अपनी सब्जियां औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही हैं. किसानों ने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है.
भिंडी बेचकर भी नहीं निकली पूंजी
बरवाटांड़ निवासी किसान देवेंद्र दांगी ने बताया कि उन्होंने चार हजार रुपये किलो की दर से भिंडी का बीज खरीदा था. इसके अलावा साढ़े तीन हजार रुपये का गोबर खाद डाला और मेहनत अलग से लगी. बावजूद इसके भिंडी बेचकर मुश्किल से पांच हजार रुपये ही मिल पाए. उन्होंने बताया कि मूली की खेती भी की थी, लेकिन ओलावृष्टि से फसल बर्बाद हो गई.
गोभी की खेती में भी नहीं हुआ फायदा
जांगी निवासी किसान ललन कुमार ने बताया कि उन्होंने बंधा गोभी की खेती की थी. बाजार में गोभी मात्र छह रुपये किलो बिका. खेती में करीब 10 हजार रुपये खर्च हुए थे, लेकिन मुश्किल से पूंजी ही निकल पाई. लाभ नहीं होने से किसान काफी निराश हैं.
अब मकई और बरसाती फसल से उम्मीद
बरवाटांड़ निवासी किसान सहदेव महतो ने बताया कि भिंडी दो से तीन रुपये किलो और बैंगन आठ से दस रुपये किलो बिक रहा है. उन्होंने कहा कि पूंजी निकलना तो दूर आधे से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा. अब वे मकई और बरसाती भिंडी लगाने की तैयारी कर रहे हैं. किसानों ने सरकार से सब्जियों का उचित समर्थन मूल्य तय करने और किसानों को राहत देने की मांग की है.
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