भुरकुंडा : भुरकुंडा बाजार में अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन, सीसीएल व पीडब्ल्यूडी की संयुक्त कार्रवाई पर बवाल मच गया है. गुरुवार को मतकमा चौक से शुरू हुए मापी के काम को व्यवसायियों ने शुक्रवार को जनता टॉकिज के समीप रोक दिया. नारेबाजी की. विरोध को देखते हुए मापी टीम को वापस लौटना पड़ा. व्यवसायियों का कहना था कि मापी मनमाने व गलत तरीके से की जा रही है.
पीडब्ल्यूडी ने इसी सड़क को सौंदा डी से पतरातू तक 10 मीटर (साढ़े 32 फीट) की चौड़ाई में बनाया है. अब उसी सड़क को मतकमा चौक से जोड़ने के लिए 60 फीट जमीन की मापी कर रही है. यह दोहरा मापदंड गलत है. वह भी तब, जब भुरकुंडा जिले का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है. व्यवसायियों का कहना था कि बाजार के सड़क की चौड़ाई झारखंड के सभी जिलों में अपेक्षाकृत कम होती है. यहां इसके विपरीत चौड़ाई बढ़ा कर दुकानदारों को उजाड़ने की साजिश की जा रही है.
बैठक में बनी रणनीति, उपायुक्त को सौंपेंगे ज्ञापन : भुरकुंडा बाजार के व्यवसायियों की बैठक जनता टॉकिज कैंपस में हुई. बैठक में प्रशासन, सीसीएल व पीडब्ल्यूडी की मनमानी की निंदा की गयी.
कहा गया कि अतिक्रमण हटाने की जो नीति है, उससे पूरा भुरकुंडा बाजार खाली हो जायेगा. सीसीएल प्रबंधन ने ही जरूरत के अनुसार वर्षों पूर्व बाजार बसाया था. प्रबंधन की लिखित व मौखिक सहमति भी शामिल थी. अब सीसीएल वर्षों से रोजी-रोटी चला रहे लोगों को उजाड़ने पर अमादा हो गया है. यदि पीडब्ल्यूडी को हाइवे बनाना है, तो अन्य बाजारों की तरह बाइपास सड़क बना कर पतरातू से जोड़े. ऐसा नहीं हुआ तो अतिक्रमण की मापी नहीं होने दी जायेगी. निर्णय हुआ कि डीसी को संबोधित ज्ञापन सीओ सह दंडाधिकारी को सौंप कर रोड की चौड़ाई अधिकतम 35 फीट करने की मांग की जायेगी.
बैठक में जिप सदस्य दर्शन गंझू, मुखिया प्रदीप मांझी, पंसस प्रतिनिधि रोबिन मुखर्जी, शिवप्रकाश सिंह, राजू पांडेय, श्याम सिंह, मो सलाउद्दीन, मो जफर इकबाल, संजय प्रसाद, गोपाल सोनी, रमेश पांडेय, अमरनाथ कुमार, अशोक शर्मा, प्रभात शर्मा, सौरभ श्रीवास्तव, शकील अख्तर, मो मोजम्मिल, एजाज अहमद, हीरालाल साह, संजय कुमार, मंटू गुप्ता, मो इरशाद, राजेश कुमार, मो सरफराज, मो अनवर अंसारी, पप्पू गोस्वामी, अजय सिन्हा, सुशील सिंह, महेंद्र मोदी समेत कई व्यवसायी मौजूद थे.
अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की गयी है : सीओ
व्यवसायियों के भारी विरोध को देखते हुए सीओ सह दंडाधिकारी अजय तिर्की ने भुरकुंडा बाजार में अतिक्रमण की मापी के लिए एसडीओ से बाजार में धारा 144 लगाने की मांग की है. इस कार्रवाई के लिए जिला से अतिरिक्त पुलिस बल भी मांगा है. सीओ ने कहा कि तब तक के लिए मापी का काम स्थगित रहेगा. व्यवसायियों के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी जो भी मांग है, वे लिखित तौर पर उपायुक्त को दे सकते हैं. वहां से जैसा निर्देश मिलेगा, उसके अनुरूप कदम उठाया जायेगा.
1994 में दुकानदारों से केस हार चुका है सीसीएल
रेलवे पटरी साइड से मेन रोड किनारे तक के दुकानदारों को मापी टीम ने पूरा अतिक्रमण करार दिया है. इस किनारे बसे दुकानदारों के लिए राहत भरी खबर यह है कि करीब 23 वर्ष पूर्व सीसीएल का ऐसा ही प्रयास विफल हो चुका है. तब 22 मार्च 1994 को हाइ कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने 365 दुकानदारों के पक्ष में फैसला देते हुए साफ कर दिया था कि ये दुकानदार वर्षों से यहां रोजी-रोटी चला रहे हैं. इसलिए सीसीएल इन्हें उजाड़ नहीं सकता है.
हालांकि किराये पर हाइ कोर्ट ने अपनी सहमति दी थी. कहा था कि सीसीएल दुकानदारों से मिल कर एक भाड़ा तय कर सकता है. इस संबंध में उस समय दुकानदारों का नेतृत्व कर रहे वर्तमान वैश्य मोरचा के केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहू ने बताया कि सीसीएल के इशारे पर तत्कालीन पतरातू सीओ इंद्रदेव राम ने नौ मार्च 1994 को एनाउंस कराया था कि 13 मार्च तक दुकानदार अपनी दुकान खाली कर दें, अन्यथा बुलडोजर चला दिया जायेगा.
इसी के आलोक में दुकानदारों की ओर से श्री साहू ने हाइ कोर्ट में रिट दायर किया था. हाइ कोर्ट के इसी फैसले के आधार पर उस वक्त बरकाकाना, पतरातू व बेरमो में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सीसीएल को रोकनी पड़ी थी. इसलिए यदि दुकानदार एकजुट होकर उसी फैसले को आधार बना कर अगर अपनी लड़ाई लड़ेंगे तो सकारात्मक परिणाम आ सकता है.
