पीटीपीएस छाई डैम संख्या एक के विस्थापित हुए गोलबंद
सरकार लौटाये उनकी जमीन या दे मुआवजा
भुरकुंडा : पीटीपीएस छाई डैम संख्या एक के विस्थापितों ने कहा है कि सरकार उनकी जमीन वापस करे या फिर भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत उन्हें मुआवजा दे. प्रेस कांफ्रेंस में शामिल बलकुदरा, रसदा व जयनगर के विस्थापित प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से कहा कि पुलिस-प्रशासन जोर जुल्म के साथ दमनकारी कार्रवाई की बदौलत हमारी जमीन छीनना चाहती है. करीब चार दशक पूर्व हमारी जमीन कौड़ियों के भाव ले ली गयी थी. हम लोगों ने जमीन के एवज में जब पैसा नहीं लिया, तो नौ से 12 रुपये प्रति डिसमिल की दर से जमीन का पैसा पीटीपीएस प्रबंधन ने ट्रेजरी में जमा करा दिया.
जब इसके खिलाफ हम लोगों ने आवाज उठायी, तो हम पर लाठी व गोली चलायी गयी. केस कर जेल भेज दिया गया. अब उसी जमीन को पीटीपीएस एनटीपीसी को सौंप रही है. हमारे विरोध के बाद 29 जनवरी को रामगढ़ डीसी ए दोड्डे ने सकारात्मक आश्वासन दिया. लेकिन अगले ही दिन प्रशासन व प्रबंधन आश्वासन के विपरीत दमनकारी नीति अपनाते हुए जमीन की मापी शुरू कर दी. हम अपने बच्चों को लाठी और गोली नहीं खाने देंगे.
न्याय मिलने तक जारी रहेगा अनशन : हमारा अनशन जिंदल बाउंडरी (फोरलेन) के पास बुधवार से शुरू होगा, जो न्याय मिलने तक जारी रहेगा. यदि हमारा कोई आंदोलनकारी साथी अनशन के दौरान कुरबान हो जायेगा, तो दूसरा साथी आमरण अनशन पर बैठ जायेगा. कहा कि हम लोग विकास के विरोधी नहीं हैं.
प्रेस कांफ्रेंस में आदित्य नारायण प्रसाद, विजय साहू, संजय साहू, मैनेजर साहू, शंकर प्रसाद, विजय मुंडा, कुमेल उरांव, संजय प्रसाद साहू, लक्ष्मण मुंडा, दीपक कुमार, विनोद कुमार, मनोज कुमार, बसंत कुमार, अर्जुन सिंह, लक्ष्मी साहू, अरुण साहू, सागर प्रसाद, महावीर महतो, विनोद यादव, नागेश्वर ठाकुर, वीरेंद्र कुमार, संता कुमार, युगेश यादव, दिनेश मुंडा, कमलेश कुमार सिंह, ननकू मुंडा, राजाराम प्रजापति, विजय आदि शामिल थे.
मामले पर सीओ को सौंपा ज्ञापन : विस्थापितों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को अपनी 10 सूत्री मांगों के समर्थन में पतरातू सीओ को ज्ञापन दिया है.
इसमें उचित मुआवजा, नौकरी, पुनर्वास सहित अन्य समस्याओं के समाधान के बगैर छाई डैम की मापी नहीं करने, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत अधिग्रहण की प्रक्रिया नये सिरे से शुरू करने, अधिग्रहित जमीन के उत्तराधिकारियों को स्थायी नौकरी देने, अधिग्रहित मकानों से संबंधित परिवार को 50 डिसमिल जमीन व पक्का मकान देने, विस्थापित परिवार को परिचय पत्र निर्गत करने, आवश्यकता से अधिक अधिग्रहित जमीन को मुक्त करने, झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड की नौकरियों व ठेकेदारी में विस्थापित परिवार के आरक्षण की व्यवस्था करने, प्रभावित गांवों में मुफ्त मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने, कारखाना से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए उचित व्यवस्था करने की मांगें निहित है. ज्ञापन की प्रतिलिपि केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री सह क्षेत्र के सांसद जयंत सिन्हा, विधायक निर्मला देवी, डीसी, एसपी, एसडीओ, डीएसपी, बीडीओ, थाना प्रभारी, जिप सदस्य, प्रमुख, उप प्रमुख, मुखिया, पंसस को भी दी गयी है.
तीन गांवों की 432 एकड़ जमीन का है मामला
पीटीपीएस छाई डैम संख्या एक से तीन गांव बलकुदरा, रसदा व जयनगर का सैकड़ों परिवार विस्थापित हुआ है.
तीनों गांवों को मिला कर लगभग चार दशक पूर्व कुल 432 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गयी थी. इसमें बलकुदरा की 192 एकड़, रसदा की 147 एकड़ व जयनगर की 93 एकड़ जमीन ली गयी थी. इसके विरुद्ध उस वक्त भी तीनों गांवों के लोग आंदोलित थे. 1991 में यह आंदोलन तेज हुआ था. आंदोलन जब चरम पर पहुंचा, तो उसका दमन करने के लिए पुलिस-प्रशासन ने 1996 में ग्रामीण विस्थापितों पर गोली चलवा दी.
आंदोलन के नेतृत्वकर्ताओं के विरुद्ध केस दर्ज कर उन्हें जेल में भेज दिया गया. आंदोलन के क्रम में 1996 में पीटीपीएस प्रबंधन ने पहली बार जमीन अधिग्रहण की बात पेपर पर स्वीकार करते हुए 9-12 रुपये प्रति डिसमिल की दर से ट्रेजरी में पैसा जमा करा दिया. लेकिन ग्रामीणों ने मुआवजे की राशि नहीं ली. विस्थापित आज भी न्याय के लिए लड़ रहे हैं.
