चैनपुर : मांडू प्रखंड अंतर्गत नावाडीह पंचायत के जरहैया टोला में बुधवार को राजेंद्र बिरहोर (40 वर्ष) की मौत हो गयी. सूचना मिलने पर राजेंद्र के घर अधिकारियों की टीम पहुंची. सीओ ने पारिवारिक लाभ के तहत परिजनों को 10 हजार रुपये नकद व दो क्विंटल चावल दिया. उन्होंने परिजनों को बिरसा आवास व विधवा पेंशन देने का आश्वासन दिया.
मौके पर प्रखंड कल्याण पदाधिकारी विनोद कुमार सिन्हा, भाजयुमो नेता पंकज साहा, मुखिया भगवती देवी, पंसस संजय प्रसाद, बड़गांव मुखिया कन्हैया रविदास, पंचायत सेवक नेमचंद करमाली, राजस्व कर्मचारी रविभूषण ठाकुर, गोपाल मांझी, पूर्व मुखिया विनोद बिहारी महतो, उपमुखिया तेजू महतो, बड़गांव उपमुखिया रामअवतार प्रसाद, बुलबुल कुमारी, रामप्रसाद महतो, फुलेश्वर प्रजापति, बलराम प्रसाद मौजूद थे.
आर्थिक रूप से कमजोर था राजेंद्र : राजेंद्र बिरहोर घर का एक मात्र कमानेवाला व्यक्ति था. मजदूरी कर वह अपने परिजनों का भरण-पोषण करता था. राजेंद्र अपने पीछे पत्नी समेत छह बच्चों को छोड़ गया है. परिजनों ने बताया कि अब तक उनलोगों का आधार कार्ड और राशन कार्ड नहीं बना है. अब तक सरकारी लाभ के तहत एक मात्र अधूरा इंदिरा आवास मिला है. अब तक खिड़की-दरवाजा भी नहीं लगा है. घर में प्लास्टर भी नहीं हुआ है. पूरा परिवार जमीन पर सोता है.
13 बिरहोर सदस्य हैं : जरहैया में आदिम जनजाति बिरहोर के मात्र दो घर हैं. इसमें 13 सदस्य रहते हैं. दोनों परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है. बिरहोर परिवार के बच्चे नव प्राथमिक विद्यालय, जरहैया में पठन-पाठन के लिए जाते हैं. बिरहोर परिवार के सदस्यों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कभी भी इस टोले में स्वास्थ्य शिविर नहीं लगाया जाता है.
