गोला व दुलमी में पेयजल की किल्लत
कुएं, तालाब सहित अन्य जलस्रोत भी सूख गये हैं
13 गांवों में पांच वर्ष पहले मिनी जलमीनार का निर्माण किया गया है,लेकिन नहीं शुरू हुई जलापूर्ति
जलमीनार निर्माण एवं पाइप लाइन बिछाने का काम कर दिया है शुरू
गोला/दुलमी : गोला प्रखंड की लाइफ लाइन मानी जाने वाली गोमती नदी इन दिनों सूख चुकी है. इसके कारण क्षेत्र के कुएं, तालाब सहित अन्य जलस्रोत भी सूख गये हैं. गोला में जलमीनार से पानी की सप्लाई की जाती है, लेकिन नियमित रूप से सप्लाई नहीं होने से इनके समक्ष पेयजल की संकट उत्पन्न हो गयी है. नदी सूख जाने से गोला के लोगों को नहाने-धोने में काफी परेशानी हो रही है. किसानों का सिंचाई कार्य भी नहीं हो रहा है. प्रखंड के 13 विभिन्न गांवों में पांच वर्ष पहले मिनी जलमीनार का निर्माण किया गया है.
इन जलमीनारों से अब पानी सप्लाई चालू नहीं की जा सकी है. इससे जलमीनार वर्षों से बेकार हैं. गोविंदपुर, रायपुरा, रोला, सोनडीमरा, पतरातू, जोभिया, सरलाकला, डभातू सहित अन्य गांवों में मिनी जलमीनार का निर्माण किया गया है. पेयजल व स्वच्छता विभाग ने गांव-गांव में पेयजलापूर्ति के लिए वृहत पैमाने पर जलमीनार निर्माण एवं पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया है. इसका निर्माण पूरा होने के बाद प्रखंड के लोगों की पेयजल समस्या दूर हो जायेगी.
पांच बजे से पानी की तलाश
दुलमी प्रखंड क्षेत्र की होन्हे पंचायत क्षेत्र के लोगों को पेयजल के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पेयजल के लिए गांव के अधिकांश लोग कुआं पर निर्भर हैं. लोगों का सहारा केवल चापाकल है. गांव के कई चापाकल खराब होने से पानी के लिए काफी परेशानी होती है. सुबह उठते ही महिलाओं को पेयजल की चिंता सताने लगती है. पांच बजे सुबह से ही महिलाएं कुआं व चापाकल के समीप लाइन लग कर पानी भरती हैं.
हालांकि, पेयजल व स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के प्रयास से इस पंचायत में पेयजलापूर्ति के लिए मालीशीली टुंगरी में जलमीनार का निर्माण कर पाइप लाइन बिछायी गयी है. लेकिन अबतक पेयजलापूर्ति शुरू नहीं हो पायी है. पाइपलाइन से पेयजलापूर्ति शुरू होने से लोगों को पेयजल के लिए परेशानी नहीं होगी. प्रखंड क्षेत्र के कई अन्य गांवों में भी पानी के लिए लोगों को काफी परेशानी हो रही है.
