अजय तिवारी की रिपोर्ट
Patratu News: जिस पतरातू क्षेत्र को विद्युत नगरी के नाम से जाना जाता है और जहां से झारखंड समेत कई राज्यों को बिजली आपूर्ति की जाती है, वहीं आज स्थानीय लोग खुद लगातार बिजली संकट झेलने को मजबूर हैं.
आंधी-बारिश के बाद चरमराई बिजली व्यवस्था
बीते लगभग 1 सप्ताह से क्षेत्र में बिजली व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. लगातार हो रही बिजली कटौती और इस गर्मी में घंटों बाधित विद्युत आपूर्ति ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते शुक्रवार को आए तेज आंधी और बारिश के बाद पूरे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई थी. कई इलाकों में तीन से चार दिनों तक बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से बहाल नहीं हो सकी थी. कहीं तार टूटे, तो कहीं फॉल्ट के कारण लोग अंधेरे में रहने को विवश हो गए. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्थिति लगभग समान बनी हुई है.
बिजली जाते ही ठप हो जा रहा मोबाइल नेटवर्क
सबसे बड़ी समस्या यह है कि बिजली आपूर्ति बाधित होते ही मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवा भी ठप पड़ जाती है. क्षेत्र में विभिन्न कंपनियों के टावर बिजली पर निर्भर हैं, जिसके कारण बिजली जाते ही नेटवर्क गायब हो जाता है. इससे लोगों को ऑनलाइन कार्य, बैंकिंग सेवा, पढ़ाई, कार्यालयीन कार्य और आपातकालीन संपर्क में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
जर्जर तार और पेड़ों की डालियां बन रहीं परेशानी की वजह
कई स्थानों पर लोग फोन तक नहीं कर पा रहे हैं. स्थानीय नागरिकों ने बताया कि यह समस्या नई नहीं है. इससे पहले भी 33 हजार और 11 हजार केवी विद्युत तारों में पेड़ों की डालियां टकराने के कारण बार-बार फॉल्ट होता रहा है. समय पर पेड़ों की छंटाई नहीं होने और विद्युत लाइनों के रखरखाव में लापरवाही के कारण हल्की आंधी या बारिश में भी आपूर्ति व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है.
बिजली संकट से पानी और पढ़ाई पर भी असर
गर्मी के इस मौसम में बिजली संकट ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है. पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है. कई मोहल्लों में लोग पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं. बच्चों की पढ़ाई और व्यवसायिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं. क्षेत्रवासियों ने विद्युत विभाग से मांग की है कि जर्जर तारों को बदला जाए, विद्युत लाइनों के आसपास पेड़ों की नियमित छंटाई कराई जाए तथा आपूर्ति व्यवस्था को स्थायी रूप से सुधारने के लिए ठोस पहल की जाए, ताकि विद्युत नगरी कहलाने वाले पतरातू के लोगों को लगातार अंधेरे और परेशानियों का सामना न करना पड़े.
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