मेदिनीनगर.जैन समाज के आत्म संयम के 10 दिवसीय महापर्व पर्वाधीराज पर्यूषण के तीसरे दिन शुक्रवार को उत्तम आर्जव धर्म का पूजा विधान किया गया. शहर के जैन मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा व पूजन हुआ. इसके बाद तत्वार्थ सूत्र का पाठ और प्रवचन हुआ.
सांगानेर से पधारे विद्वान पंडित आदिश जैन शास्त्री ने उत्तम आर्जव धर्म की व्याख्या की. उन्होंने कहा कि उत्तम आर्जव जैन धर्म की महत्वपूर्ण अवधारणा है. यह मन से छल-कपट का त्याग कर सरलता और ईमानदारी अपनाने की प्रेरणा देता है. मन, वचन और कर्म में शुद्धता व निष्कपटता रखना ही आर्जव धर्म का मूल भाव है. छल-कपट, झूठ और दिखावा इसके सिद्धांतों के विपरीत हैं.
उन्होंने कहा कि निष्कपट और पारदर्शी जीवन जीने से मानसिक शांति मिलती है. इसके अनुरूप आचरण करने से जीव के कल्याण और सदगति का मार्ग प्रशस्त होता है. शास्त्री जी के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने निष्कपट रहने और शरीर को शुद्ध रखने का संकल्प लिया. बबीता काला ने भजन प्रस्तुत किया.
भगवान का प्रथम अभिषेक शांति देवी छाबड़ा परिवार ने किया. प्रथम शांतिधारा के पुण्यार्जक विजय कुमार, विवेक कुमार व सरस छाबड़ा परिवार रहे. गुरुवार रात महिला मंडल की रिंकू छाबड़ा, सोनिया पाटनी व अन्य सदस्यों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया. मौके पर सुरेश जैन, सरस जैन, सागर जैन, रोहित जैन, पदमचंद पाटनी, आशीष रारा, सुनीता पांड्या, अरमान विनायका, विनय जैन, अनिल जैन, मनोज पहाड़िया सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे.
