सतबरवा अंचल कार्यालय बिचौलियों के कब्जे में, आमजन हलकान

राजस्व कर्मियों की मनमानी से जमीन व प्रमाण-पत्र के काम सालों से लंबित

राजस्व कर्मियों की मनमानी से जमीन व प्रमाण-पत्र के काम सालों से लंबित

प्रतिनिधि, सतबरवा

सतबरवा अंचल कार्यालय में काम नहीं होने से आम लोग परेशान हैं. जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आरोप है कि अंचल कार्यालय पूरी तरह बिचौलियों के कब्जे में है. स्थिति यह है कि कई राजस्व कर्मचारी अपने कार्यालय में नियमित रूप से नहीं बैठते, जिससे छोटे-छोटे कामों के लिए भी लोगों को पूरा दिन बैठकर खाली हाथ लौटना पड़ता है. दूर-दराज से पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण जब अंचलाधिकारी से मिलने आते हैं, तो सुरक्षा गार्ड द्वारा यह कहकर लौटा दिया जाता है कि सीओ व्यस्त हैं. नाम नहीं छापने की शर्त पर एक सुरक्षा गार्ड ने बताया कि किसी ग्रामीण या पंचायत प्रतिनिधि को सीओ के दफ्तर में भेजने पर उन्हें भला-बुरा सुनना पड़ता है. वहीं, बिचौलियों के लिए साहब का दफ्तर कार्यालय अवधि में हमेशा खुला रहता है और उन पर कोई रोक-टोक नहीं होती. ग्रामीणों का कहना है कि बिचौलियों के माध्यम से जटिल से जटिल काम भी कम समय में हो जाता है. कई अधिकारी और राजस्व कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है. ऑनलाइन रसीद, ऑनलाइन म्यूटेशन समेत दर्जनों मामले वर्षों से लंबित पड़े हैं.

केस स्टडी – एक

ऑनलाइन म्यूटेशन के लिए दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं

फोटो 24 डालपीएच 3

सतबरवा के जनक प्रसाद ने बताया कि उनकी पत्नी सुनीता देवी के नाम हुड़मुड गांव में 15 डिसमिल जमीन है (खाता संख्या 18, प्लॉट संख्या 223)। वर्ष 2022 में जमीन के ऑनलाइन म्यूटेशन के लिए आवेदन दिया गया था, जिसमें पूर्व राजस्व कर्मचारी, अमीन और सीआई की रिपोर्ट भी संलग्न है. जनक प्रसाद का आरोप है कि कई बार अंचल कार्यालय का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन हर बार बिचौलियों से मिलकर आने की बात कही जाती है. दिसंबर और जनवरी में कई बार सीओ से मिलने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा गार्ड ने व्यस्तता का हवाला देकर मिलने नहीं दिया.

केस स्टडी – दो

जाति प्रमाण पत्र नहीं मिलने से छात्रा की पढ़ाई पर संकट

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सतबरवा के मुकेश गोस्वामी की पुत्री दिव्या गोस्वामी ने दो जनवरी 2026 को जाति प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन अब तक प्रमाण पत्र निर्गत नहीं हुआ. दिव्या नौवीं कक्षा की छात्रा है. उसने बताया कि जाति प्रमाण पत्र नहीं मिलने से स्कूल में रजिस्ट्रेशन में परेशानी हो रही है. पिता मुकेश गोस्वामी का आरोप है कि पूछने पर सिस्टम का हवाला दिया जाता है और सवाल करने वाले लोगों के आवेदन को खतियान नहीं पढ़ाने के नाम पर रिजेक्ट कर दिया जाता है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर छात्रों को कब तक परेशान किया जायेगा.

केस स्टडी – तीन

इलाज के लिए जमीन बेचनी है, पर फाइल अटकी

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सतबरवा के इम्तियाज आलम ने बताया कि उनके पिता स्व. मुख्तार आलम के नाम हुड़मुड गांव में सात एकड़ सात डिसमिल जमीन है (खाता संख्या 05, प्लॉट संख्या 236, 535, 171, 43, 555 (सी) आदि).उन्होंने आठ मार्च 2025 को ऑनलाइन आवेदन दिया था. इसके अलावा आपकी योजना आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में भी आवेदन किया और कई बार व्यक्तिगत रूप से अंचल कार्यालय का चक्कर लगाया. इम्तियाज आलम ने बताया कि उनका भाई किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित है और मुंबई में इलाज चल रहा है. जमीन बेचकर उसकी जान बचाना चाहते हैं, लेकिन अंचल कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार और बिचौलियों के कारण उनका काम अटका हुआ है.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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