नावा बाजार: धुमकुड़िया भवन के निर्माण स्थल में बदलाव पर ग्रामीणों में नाराजगी

बनखेता गांव में धुमकुड़िया भवन के निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है. उनका आरोप है कि आमसभा द्वारा चयनित स्थल को छोड़कर दूसरी जगह निर्माण किया जा रहा है. ग्रामीणों ने स्थल पर ही निर्माण की मांग की है.

नावा बाजार. कुंभी कला पंचायत के बनखेता गांव में कल्याण विभाग से करीब 24 लाख 92 हजार रुपये की लागत से बन रहे धुमकुड़िया भवन के निर्माण को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है. ग्रामीणों का आरोप है कि आमसभा में भवन निर्माण के लिए जिस स्थल का चयन किया गया था, वहां निर्माण नहीं कराकर दूसरे स्थान पर कराया जा रहा है.

ग्रामीणों ने चयनित स्थल पर ही निर्माण कराने की मांग की है और मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है. ग्रामीणों के अनुसार, बाद में स्थल बदलकर गांव के ही अखलेश यादव के निजी आवास की बाउंड्री से सटाकर भवन बनाया जा रहा है. इसे आमसभा के निर्णय के विपरीत बताते हुए ग्रामीणों ने पलामू जिला कल्याण पदाधिकारी को आवेदन देकर निर्माण रोकने और जांच की मांग की.

जिला कल्याण पदाधिकारी ने बीडीओ रेणु बाला को जांच का निर्देश दिया. बीडीओ ने जेपीएस राधेश्याम राम को जिम्मेदारी दी. जेपीएस ने स्थल निरीक्षण किया, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.

मुखिया सब्या सिंह और आदिवासी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र उर्फ छोटू ने कहा कि धुमकुड़िया भवन आदिवासी समाज के उत्थान और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है. इसलिए निर्माण आमसभा में चयनित स्थल पर ही होना चाहिए. अनियमितता मिलने पर संबंधित अध्यक्ष-सचिव पर कानूनी कार्रवाई हो.

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By चंद्रशेखर सिंह

चंद्रशेखर सिंह प्रभात खबर से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने लंबे समय से पत्रकारिता करियर में क्राइम, सामाजिक मुद्दों और राजनीति से जुड़े विषयों पर व्यापक रूप से काम किया है. मेदिनीनगर (पलामू) में जमीनी स्तर की पत्रकारिता में इनकी खास पकड़ रही है. समाज से जुड़े महत्वपूर्ण और अनदेखे मुद्दों को सामने लाने, आम लोगों की समस्याओं को आवाज देने और सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाने के लिए वह जाने जाते हैं. अपराध और राजनीति से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक बदलाव और जनहित के मुद्दों पर भी लगातार काम किया है. क्राइम रिपोर्टिंग, सामाजिक सरोकार और राजनीतिक पत्रकारिता उनके प्रमुख कार्यक्षेत्र रहे हैं. तीन दशकों के अनुभव के दौरान उन्होंने बदलते मीडिया परिदृश्य और पत्रकारिता के तौर-तरीकों को करीब से देखा और समझा है. उनकी पत्रकारिता में जमीनी अनुभव, सामाजिक मुद्दों की समझ और तथ्यपरक रिपोर्टिंग को विशेष महत्व मिलता है.

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