पाटन में बिजली संकट से हाहाकार, 20 मेगावाट की जरूरत के बीच मिल रही सिर्फ 5-6 मेगावाट बिजली

पलामू जिले के पाटन क्षेत्र में बिजली की अनियमित आपूर्ति से उपभोक्ता त्रस्त हैं. 20 मेगावाट की जरूरत के बावजूद मात्र 5-6 मेगावाट बिजली मिल पा रही है, जिससे तीन प्रखंडों में बिजली की भारी किल्लत है.

पाटन, पलामू : पलामू जिले के पाटन क्षेत्र में अनियमित बिजली आपूर्ति से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गयी है. क्षेत्र में लो वोल्टेज, बिजली कटौती और फॉल्ट की समस्या बनी हुई है. उपभोक्ताओं का कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत के बावजूद बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है.

विभाग की वितरण व्यवस्था के अनुसार पाटन रूट से पाटन, गहरपथरा, कुम्हवा, पदमा और परसाईं विद्युत उपकेंद्र जुड़े हैं. इन पांचों उपकेंद्रों को नियमित रूप से संचालित करने के लिए करीब 20 मेगावाट बिजली की आवश्यकता बतायी गयी है. वहीं विभागीय कर्मियों के अनुसार वर्तमान में प्रतिदिन औसतन पांच से छह मेगावाट ही बिजली मिल रही है. इतनी कम बिजली में सभी उपकेंद्रों से जुड़े उपभोक्ताओं को नियमित आपूर्ति करना संभव नहीं हो पा रहा है. कुम्हवा विद्युत उपकेंद्र के नियमित संचालन के लिए ही करीब चार मेगावाट बिजली की जरूरत बतायी गयी है.

तीन प्रखंडों में होती है बिजली की आपूर्ति

पाटन रूट के पांच विद्युत उपकेंद्रों के माध्यम से तीन प्रखंडों के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की जाती है. गहरपथरा, पाटन और कुम्हवा उपकेंद्र से पाटन प्रखंड के अलावा पड़वा प्रखंड के कुछ गांवों में बिजली पहुंचती है. पदमा उपकेंद्र से मनातू प्रखंड और परसाईं उपकेंद्र से तरहसी व पांकी प्रखंड के गांवों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था है.

पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण पाटन रूट के उपभोक्ताओं को नियमित आपूर्ति नहीं मिल पा रही है. उपभोक्ताओं के अनुसार प्रतिदिन दो से तीन घंटे ही बिजली मिलती है. वह भी कई घंटों के अंतराल पर आती है. इससे घरेलू कामकाज समेत अन्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं.

विद्युत उपकेंद्रों में कार्यरत कर्मियों के अनुसार आवश्यकता के अनुरूप बिजली नहीं मिलने से वितरण व्यवस्था में काफी परेशानी होती है. उपभोक्ताओं तक उपलब्ध बिजली पहुंचाने के लिए रात्रि में भी कर्मियों को काम करना पड़ता है. कर्मियों का कहना है कि उपकेंद्र को ही पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण किसी एक क्षेत्र में लगातार आपूर्ति करना संभव नहीं है.

रोटेशन के आधार पर चल रहे फीडर

पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण उपकेंद्रों में रोटेशन के आधार पर फीडरों का संचालन किया जा रहा है. कर्मियों के अनुसार किशुनपुर फीडर को चालू करने के लिए नावाजयपुर रूट को बंद करना पड़ता है. इसी तरह नावाजयपुर फीडर चालू करने के लिए किशुनपुर फीडर बंद करना आवश्यक हो जाता है.

उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली की मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित होने से ही क्षेत्र की समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है.


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By शुभम राय

शुभम राय झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं. ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ झारखंड की राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय समस्याओं पर खबरें लिखने में रुचि रखते हैं. तथ्यों की पड़ताल और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को सरल और प्रभावी तरीके से सामने रखना उनकी पत्रकारिता की प्राथमिकता है.

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