बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं छतरपुर के भुइयां टोला के लोग

प्रखंड क्षेत्र की खजूरी पंचायत के पुरेलवा गांव के भुइयां टोला के लोग पानी के बूंद-बूंद को मोहताज हैं.

छतरपुर. प्रखंड क्षेत्र की खजूरी पंचायत के पुरेलवा गांव के भुइयां टोला के लोग पानी के बूंद-बूंद को मोहताज हैं. करीब 100 लोगों की आबादी वाला भुइयां टोला में एक भी चापानल नहीं लगा है. गांव का एकमात्र सहारा कुआं है, जो गर्मी आते ही सूख जाता है. गर्मी के दिनों में पानी की तलाश में महिलाएं पास के बांकी नदी में गड्ढा खोद कर किसी तरह पानी निकालती हैं और घर का कार्य करती हैं. बड़ी मुश्किल से गड्ढे से पानी मिल पाता है. कभी-कभी पानी की खोज में घंटों भटकना पड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि पास के बांकी नदी में बालू माफियाओं के द्वारा आये दिन बालू का उत्खनन करते हैं. जिससे जल संकट और गहरा हो गया है. पहले थोड़ी सी गहराई में पानी मिल जाता था. लेकिन बालू का दोहन होने के बाद नदी के नीचे का पानी भी सूख गया. बालू माफिया चोरी छुपे नदी से बालू निकाल कर बेचते हैं. पंचायत के मुखिया हरेंद्र सिंह ने बताया कि पुरेलवा का भुइयां टोला अति सुदूरवर्ती क्षेत्र में पड़ता है. काफी प्रयास के बाद एक चापानल गांव के लिए स्वीकृत कराया गया था. लेकिन सड़क नहीं होने के कारण गांव तक बोरिंग गाड़ी नहीं पहुंच सकी. जिसके कारण चापानल नहीं लग सका. फागुनी भुइयां, रघुनी भुइयां, सुरेश भुइयां, जगदयाल भुइया, विनोद भुइयां ने बताया कि पानी की समस्या से इस टोला के लोग जूझते रहते हैं.

गांव में नहीं है चापानल: उमेश

ग्रामीण उमेश भुइयां ने बताया कि गर्मी के दिनों में पानी की भीषण संकट हो जाता है, एक भी चापाकल गांव में नहीं है, जिसके चलते पानी के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है. कभी-कभी पानी के बिना ही काम चलाना पड़ता है. साथ ही सड़क नहीं होने के कारण बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है. गांव के लोग नदी के रास्ते ही आते जाते हैं. बरसात के दिनों नदी में पानी भरने से आवागमन पूरी तरीके से बाधित हो जाता है.

चुआड़ी में भी नहीं मिलता पानी : कौशल्या

कौशल्या देवी ने बताया कि पानी की समस्या इतनी ज्यादा है कि खाना बनाने से लेकर अन्य कार्य के लिए सोच समझ कर पानी खर्च करना पड़ता है. कभी-कभी तो पीने के पानी की भी किल्लत हो जाती है. गांव का एकमात्र कुआं जो गर्मी आते ही सूख जाता है. नदी में चुआड़ी खोदकर किसी तरह जरूरी काम के लिए पानी लाया जाता है.

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Published by: Satyaprakash pathak

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