पलामू के कंडा पंचायत की महिला सभा में उमड़ी आधी आबादी, अधिकारों से लेकर जनसमस्याओं तक उठी आवाज

पलामू के कंडा पंचायत में महिला सशक्तिकरण और सुशासन को लेकर आयोजित सभा में सैकड़ों महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने अपने अधिकारों को समझा और अपनी समस्याओं को मुखरता से सामने रखा।


कंडा से योगेंद्र विश्वकर्मा की रिपोर्ट

Palamu News: झारखंड पलामू जिले के कंडा पंचायत सचिवालय परिसर में महिला सशक्तिकरण और सुशासन को लेकर आयोजित महिला सभा में सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिली. पंचायत के विभिन्न गांवों से पहुंची महिलाओं ने न केवल अपने अधिकारों को समझा, बल्कि अपनी समस्याओं को भी खुलकर पंचायत प्रशासन के सामने रखा. मुखिया नरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, अधिकारों की जागरूकता और विकास योजनाओं में उनकी भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया.

महिलाओं को सुरक्षित और सशक्त बनाना है: नरेंद्र सिंह

सभा को संबोधित करते हुए मुखिया नरेंद्र सिंह ने कहा कि पंचायत की हर महिला को सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना उनका मुख्य उद्देश्य है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए उनका प्रयास चौबीसों घंटे जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि पंचायत की विकास योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें और समाज में आत्मविश्वास के साथ अपनी भूमिका निभा सकें. उन्होंने कहा कि किसी भी पंचायत का समग्र विकास तभी संभव है, जब महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल हों और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक प्रभावी ढंग से पहुंचे.

अधिकारों के प्रति जागरूकता पर जोर

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद चंदा देवी ने महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि जब तक महिलाएं अपने अधिकारों को नहीं समझेंगी, तब तक समाज का पूर्ण विकास संभव नहीं है. उन्होंने टीआरआई के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए महिलाओं की सुरक्षा, आत्मविश्वास और उनके सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी. साथ ही महिलाओं को पंचायत स्तर से लेकर समाज के हर क्षेत्र में बढ़-चढ़कर जिम्मेदारी निभाने और सुशासन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया. चंदा देवी ने कहा कि जागरूक महिला ही परिवार, समाज और पंचायत को मजबूत बना सकती है. इसलिए शिक्षा, आत्मनिर्भरता और अधिकारों की जानकारी हर महिला तक पहुंचना जरूरी है.

जनता दरबार जैसा बना दूसरा सत्र

सभा का दूसरा सत्र जनता दरबार जैसा नजर आया. गांव-टोले से आई दर्जनों महिलाओं ने मुखिया नरेंद्र सिंह और पंचायत सचिव शिवकुमार यादव के सामने अपनी समस्याएं रखीं. महिलाओं ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन वितरण, पेयजल की व्यवस्था और स्वरोजगार के अवसरों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. पंचायत सचिव शिवकुमार यादव ने सभी शिकायतों और सुझावों को गंभीरता से दर्ज करते हुए कहा कि उनके त्वरित निष्पादन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि पात्र लाभुकों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

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सैकड़ों महिलाओं ने दर्ज कराई भागीदारी

कार्यक्रम में रोजगार सेवक अजय कुमार, स्वयंसेवक मनीष कुमार सिंह, संजय पासवान, वार्ड सदस्य मीना देवी, किरण देवी, सरोज कुंवर समेत पंचायत के कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. कंडा पंचायत के विभिन्न गांवों से पहुंची सैकड़ों महिलाओं और ग्रामीणों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को जनभागीदारी का बड़ा मंच बना दिया. सभा के दौरान महिलाओं ने यह संदेश भी दिया कि वे अब केवल योजनाओं की लाभार्थी बनकर नहीं रहना चाहतीं, बल्कि पंचायत के विकास और सुशासन की साझेदार भी बनना चाहती हैं. आखिर लोकतंत्र की सबसे मजबूत कुर्सी वही होती है, जिस पर बैठने के लिए आधी आबादी को पहली बार आवाज नहीं, अवसर मिलता है.

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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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