रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट
पलामू के पाटन में बारिश नहीं होने से किस वर्ग प्रभावित हो रहे हैं. मौसम की बेरुखी का सीधा असर खेती किसानी पर पड़ रहा है. पलामू के प्रखंडों में धनरोपनी का कार्य धीमी गति है. जिले के पाटन प्रखंड क्षेत्र में कृषि विभाग चार हजार हेक्टेयर भूमि पर धान रोपनी का लक्ष्य रखा है. लेकिन बारिश की कमी व सिंचाई के अभाव में अभी तक ढाई हेक्टेयर भूमि पर ही धान की रोपनी हो पाई है. जानकारी के मुताबिक पलामू जिले में पर्याप्त बारिश नहीं हो रही है, फिर भी पाटन प्रखंड क्षेत्र के कुछ गांव के किसान अपने स्तर से खेत का पटवन कर धान की रोपनी की है. निजी स्तर पर खेतों में लगाए गए ट्यूबेल व बोरिंग के माध्यम से किसानों ने धान के बिचड़ा को जीवित रखा और समय पर उसकी रोपनी शुरू कर दी है. पंप द्वारा किसानों ने सिंचाई की व्यवस्था की है. प्रखंड के हिसराबरवाडीह के किस बिट्टू सिंह, सेमरी के सुरेश पांडेय, बरडीहा गांव के राजकुमार साव ने बताया कि सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है. सरकार व प्रशासन के स्तर पर खेती कार्य के लिए सिंचाई का समुचित प्रबंध नहीं किया गया है. मॉनसून के इंतजार में किसान खेती का कार्य कैसे करेंगे. यह चिंता का विषय बना हुआ है. वे लोग अपने स्तर से सिंचाई की व्यवस्था कर धान की रोपनी शुरू की है. राजकुमार साव ने बताया कि उसने घर के पास पानी पीने के लिए बोरिंग में समरसेबल लगाया था. जब समय पर बारिश शुरू नहीं हुई, तो उसने समरसेबल के सहारे ही धान की रोपनी की है. प्रखंड के अन्य गांव के किसान भगवान भरोसे धान व अन्य फसलों की खेती के इंतजार में हैं. उन्हें उम्मीद है कि बारिश पर्याप्त होगी. लेकिन जो मॉनसून की स्थिति है, उससे दूसरी तरफ किसान चिंतित भी हैं. किसानों ने बताया कि किसी तरह धान का बिचड़ा लगाया गया है. लेकिन बारिश की यह स्थिति को देखकर अब उस बिचड़ा को बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गयी है. जब पर्याप्त बारिश होगी तभी धान की रोपनी हो सकेगी. दो वर्ष से खराब है वर्षा मापक यंत्र पाटन प्रखंड कार्यालय परिसर में लगा वर्षा मापक यंत्र करीब दो वर्षों से खराब है. विभागीय पदाधिकारी ने बताया कि इस यंत्र के खराब होने की लिखित सूचना मुख्यालय को दे दी गयी है. लेकिन अभी तक इसकी मरम्मत के लिए विभाग ने कोई पहल नहीं की है. ऐसी स्थिति में अब सवाल उठता है कि वर्षा मापक यंत्र के खराब होने से प्रखंड क्षेत्र में वर्षा की वास्तविक माफी कैसे होगी?
