पलामू में 132 की जगह 97 मेगावाट मिल रही है बिजली

पलामू में 132 की जगह 97 मेगावाट मिल रही है बिजली

शिवेंद्र कुमार : मेदिनीनगर पलामू ज़िले में इस बार की भीषण गर्मी और बिजली संकट ने लोगों का जीवन कठिन बना दिया है. औसतन 132 मेगावाट बिजली की आवश्यकता वाले ज़िले को केवल 97 मेगावाट आपूर्ति मिल रही है. इस कमी का असर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों पर साफ़ दिख रहा है.

पलामू में तीन डिवीजन हैं : डालटनगंज, छतरपुर और हुसैनाबाद. डालटनगंज डिवीजन को 85 मेगावाट की ज़रूरत है, लेकिन 65 मेगावाट ही मिल रहा है. छतरपुर में 32 मेगावाट की मांग के मुकाबले 17 मेगावाट आपूर्ति हो रही है, जबकि हुसैनाबाद में 15 मेगावाट बिजली दी जा रही है. ग्रामीण इलाकों जैसे हरिहरगंज, पीपरा और नौडीहा बाजार में बिजली की भारी कमी है.

डालटनगंज में औसतन 20 घंटे बिजली मिल रही है

शहरी क्षेत्र डालटनगंज में औसतन 20 घंटे बिजली मिल रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह 12–14 घंटे तक सीमित है और वह भी नियमित नहीं. आंधी-तूफान के बाद कई घंटों तक बिजली गुल रहती है. विभागीय कर्मियों का कहना है कि शाम छह बजे से रात 11 बजे तक ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली काटकर शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति दी जाती है.जानकारी के अनुसार सेंट्रल लोड डिवीजन से स्टेट लोड डिवीजन को बिजली दी जाती है. स्टेट लोड डिवीजन सभी सब स्टेशनों को बिजली सप्लाई करता है. सेंट्रल लोड डिवीजन से स्टेशन को बिजली कम दी जाती है. उसका असर बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ता है.

पलामू का तापमान लगातार 42 डिग्री से ऊपर बना हुआ है.

पलामू का तापमान लगातार 42 डिग्री से ऊपर बना हुआ है. गर्मी के कारण फ्रिज, कूलर और एसी का इस्तेमाल बढ़ गया है, जिससे ट्रांसफार्मर पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है. मुख्य शहर के बाजार क्षेत्र में होटल और रेस्टहाउस की संख्या बढ़ने से बिजली की खपत और तेज़ी से बढ़ी है.

आम लोगों का जीवन दूभर हो गया

जैन मंदिर रोड में रहने वाले अमरनाथ सोनी ने बताया कि इस बार की गर्मी जहां एक ओर सभी रिकॉर्ड तोड़ रही है. बिजली की आपूर्ति कम होने के कारण लोगों को परेशानी हो रही है. व्यवसायी ने बताया कि बिजली की आपूर्ति नियमित नहीं होने से व्यवसाय प्रभावित हो जाता है. बच्चे, बुजुर्ग और मरीज उमस और गर्मी से परेशान हैं. शरीर में पानी की कमी और लगातार पसीना लोगों को थका रहा है.

किसानों के लिए भी यह संकट गहरा है

मोटर न चल पाने से खेतों में पटवन नहीं हो पा रहा है, जिससे सब्ज़ी उत्पादन प्रभावित हो रहा है. व्यवसायी भी बिजली कटौती से परेशान हैं. गर्मी के दिनों में दुकानों और होटलों का कामकाज प्रभावित हो रहा है.

ट्रांसफार्मर के नीचे कूड़ा न रखें और आग न लगायें

कई बार ट्रांसफार्मर के नीचे मोहल्ले वाले कूड़ा जमा कर उसमें आग लगा देते हैं. इससे तारों में आग लगने का खतरा रहता है और बिजली आपूर्ति बाधित होती है. विभागीय अभियंता संतोष कुमार ने लोगों से अपील की है कि ट्रांसफार्मर के नीचे कूड़ा न रखें और आग न लगायें.

कोट…गर्मी के कारण बिजली की खपत बढ़ी हुई है और लोड अधिक होने से कटौती करनी पड़ रही है. शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या बनी हुई है.

कार्यपालक अभियंता

अलग से बाक्स

पहले दूसरे राज्यों से बिजली निर्भर रहता था, तो विभाग के कर्मचारियों का बहाना होता था, लेकिन पलामू को हटिया ग्रिड से जुड़ने के बाद हद तक समस्या दूर हो गयी है. लहलहे में नेशनल ग्रिड भी बन चुका है. वर्तमान में पूरे जिले को बिजली सप्लाई की जाती है. लेकिन समस्या दूर नहीं हो सकी.

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Author: Akarsh Aniket

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