पड़वा. पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से महज 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पड़वा प्रखंड परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बना करोड़ों रुपये का आवास जनता द्वारा दिए गये टैक्स के पैसे की बर्बादी की कहानी बयां कर रहा है. परिसर में बनाये गये दर्जनों आवास आज खंडहर में तब्दील हो रहे हैं, क्योंकि इनमें कोई रहता नहीं है.
सरकार ने प्रखंड स्तर पर अंचल अधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी के लिए बंगला का निर्माण कराया. कार्यालय कर्मचारी नाजिर, सहायक, प्रधान सहायक सहित विभिन्न स्तर के कर्मचारियों के लिए भी आवास बनाये गये. करोड़ों की लागत से आवासीय निर्माण का मुख्य उद्देश्य था कि अधिकारी-कर्मचारी प्रखंड मुख्यालय में रहें, जिससे ग्रामीणों को समय पर सेवा मिल सके. लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. प्रखंड परिसर में बने अधिकांश क्वार्टरों में ताला लटका है. चहारदीवारी के अंदर स्थित कार्यालय और आवास के चारों तरफ झाड़ियों का अंबार लगा है. साफ-सफाई के नाम पर कुछ नहीं होता.
घंटों करना पड़ता है इंतजार
अंचल व प्रखंड के अधिकारी और कर्मचारी जिला मुख्यालय मेदिनीनगर या अन्य शहरों में रहते हैं और ड्यूटी के समय ही प्रखंड आते हैं. इससे आम लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है.
17 किमी दूर है जिला मुख्यालय
पड़वा प्रखंड मुख्यालय भवन जिला मुख्यालय से सिर्फ 17 किलोमीटर दूर एनएच-39 से आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. किसी तरह का कोई खतरा भी नहीं है. पानी और बिजली की भरपूर व्यवस्था होने के बावजूद यहां रहने को कोई तैयार नहीं है. शाम होते ही पूरा आवासीय परिसर अंधेरे और सन्नाटे में डूब जाता है.
सीओ के स्थानांतरण के बाद खाली पड़े आवास
तत्कालीन सीओ चंद्रदेव प्रसाद के कार्यकाल में वे स्वयं प्रखंड परिसर स्थित आवास में रहते थे. उनके अलावा नाजिर सहित कुछेक कर्मचारी भी प्रखंड परिसर स्थित आवास में रहते थे. उनके स्थानांतरण के बाद कोई भी अधिकारी-कर्मचारी प्रखंड मुख्यालय में नहीं रहते हैं.
