रमेश रंजन की रिपोर्ट पलामू. पलामू जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित सतबरवा प्रखंड के मुरमा कठौतिया मलय डैम किसानों के लिए लाइफलाइन मानी जाती है. पिछले नौ महीने से नहर क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण कृषि कार्य प्रभावित हो रहा था. क्षतिग्रस्त नहर के मरम्मत के बाद बुधवार को एक बार फिर से डैम का फाटक खोल दिया गया है ताकि किसानों को पटवन का पानी खेतों तक पहुंच सके. डैम का फाटक खुलते के साथ ही एक बार फिर से धान रोपनी के लिए अपने अपने खेतों में जुट गए हैं.
मौसम के बेरुखी के कारण काफी कम हुई है धान की रोपनी
सतबरवा के किसान बिगन मिस्त्री, हलुमांड़ गांव के किसान योगेंद्र भुइयां समेत कई किसानों ने बताया कि इस वर्ष मौसम के बेरुखी के कारण प्रखंड क्षेत्र में धान की रोपनी काफी कम मात्रा में हुई है.मलय डैम के पानी से सतबरवा, लेस्लीगंज तथा मेदिनी नगर सदर प्रखंड क्षेत्र के 105 गांव के किसान आश्रित है. मगर, पिछले वर्ष 10 नवंबर 2025 को चैन संख्या 18 सतबहिनी के पास पानी के दबाव के कारण टूट गया था . क्षतिग्रस्त नहर को मरम्मत के लिए आशीष सिन्हा के नेतृत्व में किसान महापंचायत का आयोजन कर आंदोलन रूपरेखा तैयार किया.
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पलामू डीसी व पांकी विधायक के अवलोकन के बाद कार्य में आयी सक्रियता
राज्य दिशा समिति के सदस्य अवधेश सिंह चेरो व आशीष सिन्हा ने बताया कि किसानों की समस्या को देखते हुए विभाग तथा जनप्रतिनिधियों को पत्राचार किया गया जिसे गंभीरता से लेते हुए पलामू डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत व पांकी विधायक डॉ शशी भूषण मेहता के अवलोकन के बाद कार्य में विभाग के द्वारा कार्य में सक्रियता आयी, मरम्मत का कार्य हो सका. विधायक प्रतिनिधि सह सोशल मीडिया प्रभारी महेश यादव तथा सांसद प्रतिनिधि विजय पाठक ने बताया कि डॉ शशि भूषण मेहता हमेशा सक्रिय रहे तथा विभाग के पदाधिकारी पर दबाव बनाया जिसका परिणाम स्वरूप आज किसानों को पानी मिल रहा है.
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किसानों ने विभाग तथा प्रशासन के प्रति जताया आभार
किसानों ने विभाग तथा प्रशासन के प्रति आभार प्रकट किया है. इधर विभाग के कनीय अभियंता हृदय कुमार ने बताया कि सोमवार को ही डैम का फाटक खोल दिया गया था मगर क्षतिग्रस्त नहर के पास पानी लीक हो रहा था जिसे दुरुस्त कर लिया गया है तथा फिर से नहर के माध्यम से पटवन के लिए डैम का पानी खोल दिया गया है.
