सांस्कृतिक पाठशाला में साहित्य : कल, आज और कल विषय पर विमर्श

इप्टा के द्वारा संचालित सांस्कृतिक पाठशाला की 77 वीं कड़ी में “साहित्य : कल, आज और कल” विषय पर एक सारगर्भित संवाद का आयोजन हुआ.

प्रतिनिधि : मेदिनीनगर इप्टा के द्वारा संचालित सांस्कृतिक पाठशाला की 77 वीं कड़ी में “साहित्य : कल, आज और कल” विषय पर एक सारगर्भित संवाद का आयोजन हुआ. मुख्य अतिथि इप्टा झारखंड राज्य परिषद के संरक्षक अहमद बद्र ने कहा कि साहित्यकार वह होता है जिसके पास ‘कल, आज और कल’ होता है. प्रेमचंद के साहित्य में बीते हुए कल, वर्तमान और भविष्य तीनों की गूंज मिलती है. जो साहित्यकार वर्तमान को देखकर भविष्य की कल्पना करता है, वही वास्तव में जीवित रहता है. श्री बद्र ने नजीर अकबराबादी का उदाहरण देते हुए कहा कि अपने समय में उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया, लेकिन उनकी रचनाएं भविष्य पर आधारित है. इस कारण वे चर्चित हैं. उन्होंने समकालीन लेखन की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ साहित्यकार ऐसे भी हैं जो बिना चबाये व पचाये भोजन की तरह साहित्य परोस रहे हैं. वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशरफ जमाल ””””””””अश्क”””””””” ने कहा कि आज का साहित्य विविधताओं से भरा है और लोकतांत्रिकता को प्रतिबिंबित करता है.वरिष्ठ कवि शैलेंद्र कुमार ने साहित्य को एक गतिशील धारा बताया. परिचर्चा में सुरेश सिंह, शैलेंद्र कुमार शर्मा, विश्वनाथ राम, गोविंद प्रसाद, कुलदीप राम, ललन प्रजापति, प्रेम प्रकाश, शीला श्रीवास्तव और आशा शर्मा ने भी अपने विचारों को साझा किया. इप्टा के कलाकारों के द्वारा प्रस्तुत गीत “हिंदू मुसलमान की जान कहां है, मेरा हिंदुस्तान” के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. मौके पर इप्टा महासचिव अर्पिता, प्रेम भसीन, अच्छे लाल प्रजापति, उपेंद्र कुमार मिश्रा, मृदुल मिश्रा, नुदरत नवाज, शोभा प्रजापति, पंकज लोचन, राजीव रंजन, शशि पांडे, अजीत कुमार, संजीव कुमार संजू, समरेश सिंह, गोपाल सिंह, आकाश सहित कई लोग मौजूद थे.

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Author: DEEPAK

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