झारखंड में गायब हुए बच्चों के मामले में एसआइटी गठित करने का निर्देश : डीजीपी

झारखंड में गायब हुए बच्चों के मामले में एसआइटी गठित करने का निर्देश : डीजीपी

प्रतिनिधि, मेदिनीनगर पलामू समाहरणालय के ब्लॉक बी स्थित एसपी कार्यालय के सभागार में शुक्रवार को झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने प्रमंडल के तीन जिलों-पलामू, गढ़वा और लातेहार के पुलिस अधीक्षकों के साथ समीक्षा बैठक की. बैठक का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना, अपराध नियंत्रण की स्थिति का आकलन करना और नक्सल विरोधी अभियानों की प्रगति की समीक्षा करना था. इस दौरान डीजीपी ने अधिकारियों को कई दिशा-निर्देश दिये और जिलावार सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली. पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रभात खबर द्वारा झारखंड में बच्चों के तेजी से गायब होने के मुद्दे पर सवाल पूछा गया. इस पर डीजीपी तदाशा मिश्रा ने स्पष्ट किया कि राज्य में बच्चों के गायब होने की घटनाओं में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि पुलिस इस संवेदनशील मामले पर पूरी तत्परता और सतर्कता से काम कर रही है. पूरे झारखंड राज्य समेत पलामू प्रमंडल में लापता बच्चों की बरामदगी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं. डीजीपी ने बताया कि वर्तमान में गढ़वा जिले में केवल दो और लातेहार जिले में महज एक मामला शेष है. इन मामलों के त्वरित समाधान और बच्चों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का निर्देश दिया है. एसआईटी के जरिये त्वरित अनुसंधान कर इन मामलों का तत्काल समाधान किया जायेगा. जमीन विवाद में निर्णय लेने का अधिकार सिविल प्रशासन को जमीन विवादों पर पूछे गये सवाल के जवाब में डीजीपी ने कहा कि इस तरह की समस्याओं में मुख्य भूमिका सिविल प्रशासन की होती है. निर्णय लेने का अधिकार उन्हीं के पास होता है. हालांकि, जहां पुलिस की जरूरत पड़ती है, वहां विभाग सक्रिय रूप से सहयोग करता है. चैनपुर थाना क्षेत्र के रामपुर मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वहां फोर्स की तैनाती कर दी गयी है और पुलिस स्थिति पर पूरी तरह नजर रख रही है. पुलिस मुख्यालय लगातार जमीनी हकीकत पर नजर रख रहा है डीजीपी ने कहा कि प्रमंडल के सभी जिलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिसिंग की बारीकी से समीक्षा की जा रही है. पुलिस मुख्यालय लगातार जमीनी हकीकत पर नजर रख रहा है. उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर सुरक्षा को लेकर क्या चुनौतियां हैं, पुलिस के पास कौन-कौन से संसाधन उपलब्ध हैं, किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और अपराध का वर्तमान ग्राफ कैसा है-इन सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गयी. डीजीपी ने इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इस तरह की समीक्षा बैठकें नियमित रूप से होती हैं, ताकि पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके. उन्होंने तीनों जिलों के एसपी की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में नक्सल विरोधी अभियानों और अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय सफलता मिल रही है. बैठक में आइजी नरेंद्र कुमार सिंह, आइजी अजय लिंडा, पलामू के डीआइजी किशोर कौशल, पलामू के एसपी कपिल चौधरी, लातेहार के एसपी कुमार गौरव और गढ़वा के एसपी आशुतोष शेखर मौजूद थे. डीजीपी ने कहा कि यह बैठक पुलिस विभाग की नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने तीनों जिलों के एसपी की सराहना करते हुए उन्हें युवा, ऊर्जावान और मेहनती बताया, जिनके नेतृत्व में फील्ड में बेहतरीन काम हो रहा है.

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Author: Akarsh Aniket

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