NPU में वित्तीय अनियमितताओं का मामला राजभवन पहुंचा, वित्त मंत्री ने कुलपति को तत्काल हटाने की मांग की

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) में करोड़ों की वित्तीय अनियमितताओं का मामला राजभवन पहुंच गया है. वित्त मंत्री ने राज्यपाल से कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह को तत्काल पदमुक्त करने की मांग की है.

मेदिनीनगर. पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर के पांकी रोड स्थित नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब राजभवन तक पहुंच गया है. झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मंगलवार को राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर एनपीयू के कुलपति डॉ दिनेश कुमार सिंह को तत्काल पदमुक्त करने की मांग की.

वित्त मंत्री ने राज्यपाल को पत्र सौंपकर कहा कि कुलपति के विरुद्ध अंकेक्षण में गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आयी हैं. ऐसी स्थिति में उनके पद पर बने रहने से जांच से जुड़े साक्ष्यों को प्रभावित किये जाने की आशंका है.

राजभवन को पहले भी भेजे गये थे पत्र

वित्त मंत्री ने पत्र में कहा है कि एनपीयू में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की जांच को लेकर उन्होंने राजभवन को 28 मार्च और 31 दिसंबर 2025 को पत्र भेजा था. इसके बाद राजभवन के निर्देश पर झारखंड सरकार के वित्त विभाग के अंकेक्षण निदेशालय ने विश्वविद्यालय के विभिन्न मामलों की जांच की.

वित्त मंत्री के अनुसार अंकेक्षण प्रतिवेदन में करोड़ों रुपये के गबन और राशि के दुरुपयोग से संबंधित गंभीर मामले सामने आये हैं.

परीक्षा कार्यों में 2.50 करोड़ के अनियमित भुगतान का उल्लेख

वित्त मंत्री ने कहा कि अंकेक्षण रिपोर्ट में परीक्षा कार्यों के मद में करीब 2.50 करोड़ रुपये के अनियमित भुगतान का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा वर्तमान कुलपति की नियुक्ति को नियम विरुद्ध बताये जाने तथा उनके कार्यकाल के बार-बार विस्तार का भी अंकेक्षण प्रतिवेदन में उल्लेख होने की बात कही गयी है.

बजट स्वीकृति के बिना दीक्षांत समारोह में खर्च का आरोप

वित्त मंत्री ने अक्टूबर 2025 में आयोजित एनपीयू के तृतीय दीक्षांत समारोह को लेकर भी सवाल उठाया है. पत्र में कहा गया है कि समारोह के लिए 79 लाख 35 हजार रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया था. आरोप है कि राज्यपाल सचिवालय से बजट की स्वीकृति प्राप्त किये बिना ही राशि खर्च कर दी गयी.

इसी तरह वर्ष 2021-22 में डिजिटल बोर्ड की खरीद के लिए आवंटित 80 लाख रुपये के मामले को भी वित्त मंत्री ने गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया. उनके अनुसार राशि पीएल खाते में रखी गयी थी, लेकिन बिना पुनर्विनियोजन के कुलपति द्वारा राशि खर्च कर दी गयी. वित्त मंत्री ने इसे वित्तीय प्रबंधन के नियमों के विपरीत बताया है.

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अधिकारों पर रोक के पांच घंटे बाद रजिस्ट्रार का तबादला

वित्त मंत्री ने पत्र में कुलपति के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर लगायी गयी रोक के बाद हुई कार्रवाई का भी उल्लेख किया है. उन्होंने कहा कि अंकेक्षण प्रतिवेदन के आधार पर राजभवन ने कुलपति के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी.

इसके करीब पांच घंटे के अंदर कुलपति ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार का तबादला कर दिया. इसके बाद किसी अन्य व्यक्ति को रजिस्ट्रार नियुक्त किये जाने की बात भी पत्र में कही गयी है.

निष्पक्ष जांच के लिए पद से हटाना जरूरी : वित्त मंत्री

राज्यपाल से मुलाकात के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में कुलपति का पद पर बने रहना जांच की निष्पक्षता के लिहाज से उचित नहीं है. उन्होंने आशंका जतायी कि पद पर रहते हुए कुलपति आरोपों से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्यों को प्रभावित या नष्ट कर सकते हैं.

वित्त मंत्री ने राज्यपाल से मांग की कि डॉ दिनेश कुमार सिंह को तत्काल कुलपति पद से मुक्त किया जाए, ताकि अंकेक्षण में सामने आये मामलों की निष्पक्ष जांच हो सके और साक्ष्यों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना को समाप्त किया जा सके.

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By शिवेंद्र कुमार

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