बजट में शिक्षा व्यवस्था व रोजगार को मिले प्राथमिकता

झारखंड राज्य के वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट को लेकर प्रभात खबर ने शुक्रवार को नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के जेएन दीक्षित छात्रावास में परिचर्चा का आयोजन किया.

मेदिनीनगर. झारखंड राज्य के वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट को लेकर प्रभात खबर ने शुक्रवार को नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के जेएन दीक्षित छात्रावास में परिचर्चा का आयोजन किया. विद्यार्थियों ने शहरी व ग्रामीणों इलाकों में शिक्षा की बेहतर व्यवस्था करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने काे लेकर बजट में विशेष प्रावधान करने की जरूरत बतायी. विद्यार्थियों ने कहा कि लाेग कहते हैं कि शिक्षा वह हथियार है, जो विकास का रास्ता खोलती है. वहीं शिक्षा से ही किसी भी बच्चे का भविष्य संवरता है. सरकार व प्रशासन का मानना है कि बच्चे देश के भविष्य और युवा राष्ट्र की शक्ति होते हैं. लेकिन इस विषय पर गंभीर होकर शासन-प्रशासन को विचार करना चाहिए कि राज्य में जो शिक्षा की व्यवस्था है, उसमें बच्चों का सुंदर भविष्य कैसे गढ़ा जायेगा. रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे युवा राष्ट्र की शक्ति कैसे बन पायेंगे. ऐसी स्थिति में विकसित भारत का सपना कैसे साकार हो सकेगा. छात्र रंजन यादव ने कहा कि शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था करने की जरूरत है. उच्च व तकनीकी शिक्षा का दायरा बढ़ाने के साथ रोजगारोन्मुख शिक्षा देने व युवाओं को रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता है. बजट में ऐसा प्रावधान किया जाये जो विद्यार्थियाें व युवाओं के लिए लाभकारी हो. सुनील कुमार यादव ने बेहतर शिक्षा व युवाओं के रोजगार को विशेष प्राथमिकता देने पर जोर दिया. कहा कि वर्तमान में झारखंड राज्य में शिक्षा व रोजगार की स्थिति बदहाल है. शिक्षा के मामले में झारखंड देश के 27वें पायदान पर है. अनुमंडल स्तर पर बीएड व तकनीकी शिक्षण संस्थान खुलना चाहिए. गंगा सिंह ने सुदूरवर्ती इलाकों के स्कूली सुधार की जरूरत बतायी. कहा कि सरकार शिक्षा की व्यवस्था दुरुस्त करे, ताकि अभिभावकों को निजी विद्यालय की तरफ देखना न पड़े. प्रशांत उरांव ने स्कूल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को दूर करने और छात्रवृत्ति की राशि को बढ़ाने पर जोर दिया. उदय सिंह ने ग्रामीण इलाकों में भी उच्च शिक्षण संस्थान खोलने की जरूरत बतायी. अरुण ठाकुर, मिथलेश सिंह, मंगलदेव सिंह, मनोज सिंह, बजरंगी सिंह, सत्यम, रौशन, सुमित सिंह, नरेश सिंह, सुजीत, दीप डाॅनी कुजूर ने शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षण संस्थान की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया. भवन तो बना, मगर शिक्षकों की कमी है. प्रखंड स्तर बीएड, डिग्री कॉलेज, स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोलने की आवश्यकता है.

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By Prabhat khabar news desk

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