:बांस लगा कर खींच रहे बिजली का तार, टैंकर से खरीद पी रहे हैं पानी

वर्ष 2017 में सदर प्रखंड की कई पंचायतों को शहर में शामिल कर नगर निगम का दर्ज दिया गया.

मेदिनीनगर. वर्ष 2017 में सदर प्रखंड की कई पंचायतों को शहर में शामिल कर नगर निगम का दर्ज दिया गया. इस दौरान ग्रामीण इलाकों के लोगों को यह भरोसा दिया गया था कि शहरी सुविधा का लाभ दिया जायेगा. इसके बाद ही लोगों से किसी भी तरह का टैक्स निगम वसूल करेगा. बड़की व छोटकी बैरिया को जोड़ पंचायत से अलग कर नगर निगम में शामिल कर लिया गया. लेकिन अभी तक उस इलाके में शहरी सुविधा बहाल नहीं की गयी है. सोमवार को बड़की बैरिया में प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इसमें शामिल समाज के बुद्धिजीवियों ने बताया कि उम्मीद जगी थी कि नगर निगम में शामिल होने के बाद बड़की व छोटी बैरिया में रहने वाले लोगों को पर्याप्त शहरी सुविधा का लाभ मिलेगा. लेकिन आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी निगम प्रशासन द्वारा किसी तरह की बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी. लोगों ने कहा कि इससे बेहतर तो पंचायत में ही विकास कार्य हो रहा है. जिले की सभी पंचायतों में सरकार पेयजल, बिजली, आवास के अलावा रोजी रोजगार का अवसर दे रही है. यदि प्रशासन को शहरी सुविधा का लाभ नहीं देना है तो बड़की व छोटकी बैरिया को निगम से अलग कर पंचायत में ही शामिल कर दें. इस इलाके में मुख्य मार्ग पर बिजली के खंभे दिखाई देते हैं. लेकिन उसमें जो तार लगाया गया है, वह काफी जर्जर हो चुका है. मुख्य मार्ग से हट कर जिन लोगों ने मकान बनाया है, वे अपने घर तक बांस के सहारे बिजली ले गये हैं. बड़की व छोटकी बैरिया में अधिकांश जगहों पर इसी तरह की ही व्यवस्था देखी गयी. बैरिया से दशगात्र स्थल पर लगे ट्रांसफॉर्मर से 100 से अधिक लोगों ने विभिन्न दिशाओं में बांस के सहारे तार लपेट कर बिजली अपने घर तक ले गये हैं. इसी तरह मुख्य मार्ग पर लगे खंभे से तार खींच कर लोग बांस के सहारे अपने घर तक बिजली तार ले जाकर उपयोग कर रहे हैं. हालांकि यह जोखिम भरा है, लेकिन यहां के लोगों की विवशता भी है. क्योंकि इस क्षेत्र में जहरीले सांप घूमते रहते हैं. हाल में ही कुछ लोगों ने रसेल वाइपर नामक सांप को भगाया है. इस तरह के कई सांप क्षेत्र में घूम रहे हैं. बिजली की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए विभाग या प्रशासन के द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया. कार्यक्रम में शामिल लोगों ने सांसद, विधायक व नगर निगम के पूर्व के जनप्रतिनिधियों को भी नकारा बताया. कहा कि जनप्रतिनिधि कभी दर्शन देने भी नहीं आते हैं. बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे लोग भगवान भरोसे जीवन जीने को विवश हैं. मौके पर अमित सिंह, मंटू सिंह, बृजमोहन सिंह, निरंजन शुक्ला, लालमन पांडेय, संटू सिंह, नंदलाल तिवारी, सीडी प्रजापति, राजकुमार यादव, निरंजन शर्मा सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे.

क्या कहते है बैरिया के लोग

प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम में आम नागरिकों का जनप्रतिनिधियों व प्रशासन के प्रति आक्रोश देखा गया. लोगों ने खुल कर अपने क्षेत्र की समस्याएं रखी. पीड़ा बताते हुए लोगों ने अफसोस जाहिर किया कि बेवजह ग्रामीण इलाकों को निगम में शामिल कर समस्या से जूझने के लिए प्रशासन व सरकार ने छोड़ दिया है. बैरिया के कृष्ण गोपाल शर्मा, धर्मेन्द्र सिंह, अखिलेश्वर पांडेय, दुर्गेश पांडेय, अनुज सिंह, मनोज सिंह, गिरिवर शुक्ला, अमित सिंह आदि ने मुखर होकर समस्याएं रखी और इसका तत्काल निदान करने की मांग प्रशासन से की है. लोगों ने स्पष्ट तौर पर निगम प्रशासन से यह सवाल किया है कि क्या वे लोग सुविधा के अभाव में भी कब तक निगम को टैक्स देते रहेंगे. यदि सुविधा नहीं देना है और बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं करना है, तो इस क्षेत्र को शहर से हटा कर निगम प्रशासन पंचायत में जोड़ दे. लोगों ने कहा कि निगम प्रशासन ने आठ वर्षों में इस क्षेत्र में सुविधा के नाम पर कोई कार्य नहीं किया है. जो भी बिजली का खंभा है किसी पर भी स्ट्रीट लाइट नहीं लगायी गयी है. लोग रात में टार्च लेकर घर से निकलने को विवश हैं. जलापूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं है. गरमी में जल संकट से लोग जूझ रहे हैं. लेकिन निगम प्रशासन के द्वारा टैंकर से जलापूर्ति नहीं करायी गयी. सक्षम लोग टैंकर से पानी खरीद कर उपयोग कर रहे हैं. लेकिन मध्यम व गरीब परिवार के लोग पानी की जुगाड़ में दिनरात भटकते हैं. उनकी दशा व पीड़ा को जानने के लिए आज तक निगम के पदाधिकारी या कर्मी नहीं पहुंचे. लोगों का कहना है कि निगम सिर्फ टैक्स व जुर्माना वसूलता है. यदि कोई अपनी जमीन पर चहारदीवारी खड़ी कर रहा है, तो उससे भी निगम जुर्माना वसूल रहा है. मकान की मरम्मत करने पर भी निगम को आपत्ति है. इस क्षेत्र में मुख्य सड़क चौड़ीकरण कराने की आवश्यकता है. इसके अलावा लिंक रोड व नाली का निर्माण, सभी लोगों के घर तक बिजली पोल लगाने, स्ट्रीट लाइट लगाने व जलापूर्ति की व्यवस्था करने की आवश्यकता है.

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By SATYAPRAKASH PATHAK

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