केरोसिन डालकर महिला को जिंदा जलाने की कोशिश, राहुल प्रसाद को 10 साल की सजा

पलामू कोर्ट ने महिला को जिंदा जलाने के प्रयास के दोषी राहुल प्रसाद को 10 साल की सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

मेदिनीनगर. जिला व्यवहार न्यायालय के प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश राजकुमार मिश्रा की अदालत ने हत्या के प्रयास के मामले में दोषी राहुल प्रसाद को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. अदालत ने भारतीय दंड विधान की धारा 307 और 326 के तहत 10-10 वर्ष सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी. अर्थदंड नहीं देने पर दोषी को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा.

केरोसिन डालकर लगा दी थी आग

मामला पंडवा थाना क्षेत्र के चिल्ली बरवाडीह गांव का है. इस संबंध में गीता देवी के फर्द बयान पर पंडवा थाना में राहुल प्रसाद के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. अभियोजन के अनुसार, 11 जून 2021 की शाम करीब सात बजे राहुल प्रसाद ने पीड़िता से अपने साथ रहने को कहा था. उसके इनकार करने पर आरोपी ने उसे धमकी दी.

इसके बाद जब महिला सब्जी काट रही थी, तभी आरोपी ने कथित तौर पर उसके ऊपर केरोसिन तेल डालकर आग लगा दी. घटना में महिला गंभीर रूप से झुलस गयी थी. उसका इलाज मेदिनीनगर सदर अस्पताल के बर्न वार्ड में कराया गया था.

अस्पताल में दर्ज हुआ था फर्द बयान

घटना के बाद पुलिस पदाधिकारी ने अस्पताल में पीड़िता का फर्द बयान दर्ज किया. इसके आधार पर 13 जून 2021 को पंडवा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी. पुलिस ने अनुसंधान पूरा करने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया.

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने राहुल प्रसाद को दोषी पाया. इसके बाद अदालत ने उसे उक्त धाराओं में सजा सुनायी.

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By चंद्रशेखर सिंह

चंद्रशेखर सिंह प्रभात खबर से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने लंबे समय से पत्रकारिता करियर में क्राइम, सामाजिक मुद्दों और राजनीति से जुड़े विषयों पर व्यापक रूप से काम किया है. मेदिनीनगर (पलामू) में जमीनी स्तर की पत्रकारिता में इनकी खास पकड़ रही है. समाज से जुड़े महत्वपूर्ण और अनदेखे मुद्दों को सामने लाने, आम लोगों की समस्याओं को आवाज देने और सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाने के लिए वह जाने जाते हैं. अपराध और राजनीति से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक बदलाव और जनहित के मुद्दों पर भी लगातार काम किया है. क्राइम रिपोर्टिंग, सामाजिक सरोकार और राजनीतिक पत्रकारिता उनके प्रमुख कार्यक्षेत्र रहे हैं. तीन दशकों के अनुभव के दौरान उन्होंने बदलते मीडिया परिदृश्य और पत्रकारिता के तौर-तरीकों को करीब से देखा और समझा है. उनकी पत्रकारिता में जमीनी अनुभव, सामाजिक मुद्दों की समझ और तथ्यपरक रिपोर्टिंग को विशेष महत्व मिलता है.

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