38 लावारिस शवों का दाह संस्कार कर मानवता की मिसाल बने बैजनाथ

38 लावारिस शवों का दाह संस्कार कर मानवता की मिसाल बने बैजनाथ

रामनरेश तिवारी, मेदिनीनगर शहर के हमीदगंज निवासी बैजनाथ सिंह मानवीय सेवा की एक मिसाल बने हुए हैं. वर्ष 2023 से 21 नवंबर 2025 तक वे अब तक 38 लावारिस शवों का निजी खर्च पर दाह संस्कार कर चुके हैं. अस्पताल में दुर्घटना या बीमारी से मौत के बाद 72 घंटे तक पहचान के इंतजार में रखे गये शवों को जब लावारिस घोषित किया जाता है, तब पुलिस की सूचना पर बैजनाथ दाह संस्कार की जिम्मेदारी उठाते हैं. सितंबर 2025 तक उन्होंने 33 शवों का दाह संस्कार किया था, जबकि अक्तूबर और नवंबर में पांच अतिरिक्त शवों का अंतिम संस्कार किया गया. बैजनाथ बताते हैं कि अस्पताल में कई ऐसे मरीज भर्ती होते हैं, जिनका इलाज के दौरान मृत्यु हो जाती है और उनका कोई परिजन मौजूद नहीं होता. ऐसे मामलों में शव का अंतिम संस्कार वे स्वयं करते हैं. हरिश्चंद्र घाट तक शव ले जाने की जिम्मेदारी पुलिस निभाती है, लेकिन कफन, लकड़ी और अन्य सामग्री का पूरा खर्च बैजनाथ अपनी जेब से उठाते हैं. साधारण परिवार से होने के बावजूद वे इस सेवा कार्य को निरंतर करते आ रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि शहर में कई सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय दिखते हैं, परंतु इतनी संवेदनशील सेवा में शायद ही कोई सहयोग करता है, जो समाज के लिए चिंता का विषय है.

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By Akarsh Aniket

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