स्टोन माइनिंग व वनों की कटाई के कारण 14 वर्षों में कम हो गये हैं 82 फीसदी जलस्रोत

पलामू जिले में लगातार जल स्रोत की कमी हो रही है. जीआइएस के अनुसार यहां के जलस्रोतों में पिछले 14 वर्षों में 82 प्रतिशत की कमी आयी है.

मेदिनीनगर. पलामू जिले में लगातार जल स्रोत की कमी हो रही है. जीआइएस के अनुसार यहां के जलस्रोतों में पिछले 14 वर्षों में 82 प्रतिशत की कमी आयी है. 2011 में जिले में 46 हेक्टेयर क्षेत्र में जलस्रोत थे, लेकिन माइनिंग व खुले वनों के कारण अब मात्र आठ हेक्टेयर क्षेत्र में ही जलस्रोत सीमित हो गये हैं. इसकी जानकारी प्रशिक्षु आइएफएस नवनीत बीआर के द्वारा फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया, देहरादून के पलामू से संबंधित डाटा के तुलनात्मक अध्ययन से मिली. 2021 के सर्वे के तुलनात्मक अध्ययन में बताया गया है कि जलस्रोतों की कमी होने के पीछे माइनिंग व खुले वन का होना प्रमुख कारण हैं. बताया गया है कि क्षेत्र में माइनिंग को लेकर पर्यावरणीय शर्तों का अनुपालन भी नहीं किया जा रहा है.

ड्राइजोन में तब्दील हो गया है छतरपुर क्षेत्र

छतरपुर के बरडीहा, चेराई, हुटुकदाग, मुरुमदाग, बचकोमा सहित अन्य क्षेत्रों में काफी मात्रा में पत्थर का खनन हो रहा है. जिसके कारण पहाड़ नंगे होते जा रहे हैं. इसका पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. क्षेत्र में वैध-अवैध रूप से पत्थरों का खनन हो रहा है. पहाड़ गायब होते जा रहे हैं. छतरपुर इलाका ड्राइजोन में तब्दील हो गया है. लीज पट्टा की शर्तों का उल्लंघन करते हुए कई खान संचालकों द्वारा पत्थर निकालने के लिए सारे नियमों को ताक पर रख कर खनन किया जा रहा है.

सालों भर जल संकट बना रहता है

तापमान का धीरे-धीरे बढ़ता जाना माॅनसून सहित जनजीवन व फसलों को भी प्रभावित कर रहा है. घने जंगलों में कमी आने के कारण पलामू का मौसम अचानक व तेजी से बदल रहा है. नदियां सूख रही हैं. गर्मी समय से पहले ही बढ़ती जा रही है. इस वर्ष जनवरी महीने में ही यहां की नदियां सूख गयीं. फरवरी में मई-जून जैसी गर्मी पड़ने लगी. 28 फरवरी को अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. 15 मार्च को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. इसी वर्ष 12 अप्रैल को मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस था. इसके पीछे वैध-अवैध रूप से पत्थरों का बड़े पैमाने पर खनन और पेड़ों की कटाई जैसे कारक शामिल हैं.

जलवायु परिवर्तन के लिए खनन बड़ा कारण

मौसम वैज्ञानिकों की माने तो पलामू के मौसम में बदलाव का प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन है. पलामू में सबसे अधिक गर्मी, सबसे कम बारिश और सबसे ज्यादा ठंड पड़ता है. बड़े पैमाने पर हो रहे पत्थरों के खनन और पेड़ों की हो रही कटाई के कारण यह स्थिति उत्पन्न हो रही है.

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Published by: Satyaprakash pathak

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