बल व ज्ञान के समन्वित रूप हैं हनुमान
बल व ज्ञान के समन्वित रूप हैं हनुमान फोटो-20 डालपीएच-1मेदिनीनगर. सदर प्रखंड के बढकागांव में शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित प्रवचन में रोहतास से आये मानस प्रवक्ता पंडित विनोद पाठक ने संगीतमय कथा सुनाया. उन्होंने मानस के आधार पर बताया कि वाण लगने से जब लक्ष्मण जी मूर्च्छित हो गये, तो उन्हें बचाने के […]
बल व ज्ञान के समन्वित रूप हैं हनुमान फोटो-20 डालपीएच-1मेदिनीनगर. सदर प्रखंड के बढकागांव में शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित प्रवचन में रोहतास से आये मानस प्रवक्ता पंडित विनोद पाठक ने संगीतमय कथा सुनाया. उन्होंने मानस के आधार पर बताया कि वाण लगने से जब लक्ष्मण जी मूर्च्छित हो गये, तो उन्हें बचाने के लिए हनुमान जी ने अपना पराक्रम दिखाया. उन्होंने संजीवनी बुटी के लिए पर्वत को ही उठा लायें. इस क्रम में भरत के वाणों से वे घायल हो गये. इस तरह हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम के प्रति अपने समर्पण व भक्ति की पराकाष्ठा को प्रस्तुत किया है. श्री पाठक ने हनुमान जी की बहुमुखी प्रतिभा की विस्तार से चर्चा की. कहा कि हनुमान बुद्धि में वरिष्ठ, ज्ञान के सागर व अतुलित बलशाली हैं. भगवान श्रीराम जहां सबके दुखों का हरण करते हैं, वहीं हनुमान जी भगवान श्री राम के दुखों को ही दूर करते हैं. वाराणसी से आये मानस मार्तंड पंडित अच्यूतानंद शास्त्री ने श्रीराम भक्त हनुमान के समर्पण,भक्ति, सेवा व युद्धकौशल का चित्रण किया.
