कृष्णा गुप्ता की रिपोर्ट
पलामू जिले के हरिहरगंज में सरकारी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के दावों के बीच हरिहरगंज शहर के अररुआ खुर्द स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संचालित हो रहा है. वर्ष 2006 में प्राथमिक विद्यालय से उत्क्रमित होकर मध्य विद्यालय बना यह स्कूल 450 नामांकित विद्यार्थियों की पढ़ाई महज दो कमरों, एक बरामदे और एक छोटे कार्यालय के सहारे करा रहा है. कमरों की कमी के कारण एक ही कक्ष में तीन-तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है, जिससे पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोहम्मद मुबारक हुसैन ने बताया कि विद्यालय में छह शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन पर्याप्त भवन नहीं होने से नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संभव नहीं हो पा रहा है.
बरामदे में कक्षा एक व दो, एक कमरे में कक्षा तीन, चार व पांच तथा दूसरे कमरे में कक्षा छह, सात व आठ की पढ़ाई एक साथ होती है. इससे शिक्षक और विद्यार्थियों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने बताया कि अतिरिक्त भवन और कमरों के निर्माण की मांग को लेकर बीईईओ, जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई), स्थानीय विधायक तथा सांसद को कई बार लिखित आवेदन दिया गया है. शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विद्यालय का निरीक्षण भी किया और आश्वासन भी दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है. विद्यालय में दो शौचालय तो हैं, लेकिन किचेन शेड नहीं होने के कारण मध्याह्न भोजन एक कमरे के कोने में तैयार किया जाता है. इससे पढ़ाई और भोजन व्यवस्था दोनों प्रभावित होती हैं. विद्यालय में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे अध्ययनरत हैं और प्रतिदिन 60 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति रहती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिरिक्त भवन और किचेन शेड का निर्माण होने से बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा. शिक्षा से जुड़े लोगों का भी मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त कक्ष, सुरक्षित भवन और मूलभूत सुविधाएं जरूरी हैं. ऐसे में अररुआ खुर्द विद्यालय की समस्याओं का शीघ्र समाधान आवश्यक है, ताकि सैकड़ों बच्चों को बेहतर माहौल में शिक्षा मिल सके.
