प्रतिनिधि, मेदिनीनगर
जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा 24 मई को दिल्ली के लाल किला मैदान में जनजाति सांस्कृतिक समागम का आयोजन किया गया है. इसमें भाग लेने के लिए पलामू, गढ़वा व लातेहार जिला के जनजाति समाज के 400 महिला-पुरुष दिल्ली रवाना हुए. शनिवार की सुबह में डालटनगंज रेलवे स्टेशन से स्पेशल ट्रेन के द्वारा आदिवासी जनजाति समुदाय के लोग दिल्ली के लिए रवाना हुए. वनवासी कल्याण केंद्र के पलामू जिला सचिव अश्विनी कुमार मिश्रा ने बताया कि अपने हक-अधिकार को लेकर आदिवासी जनजाति समुदाय के लोग मुखर है.जनजाति सांस्कृतिक समागम में डिलिस्टिंग की मांग पुरजोर तरीके से आदिवासी समुदाय के द्वारा उठाया जायेगा.भारतीय संविधान में ऐसा प्रावधान है कि यदि कोई अनुसूचित जनजाति समुदाय का व्यक्ति अपने धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया है, तो उसे आरक्षण का लाभ नही मिलेगा. वैसे लोगों को आदिवासियों को मिलने वाले लाभ से बाहर किया जाये. उन्होंने बताया कि झारखंड सहित देश के अन्य राज्यों से आदिवासी जनजाति समाज के लोग जनजाति सांस्कृतिक समागम में हिस्सा लेंगे. अनुसूचित जनजाति समुदाय को उनकी विशिष्ट भारतीय सांस्कृतिक पहचान, रीति रिवाज, परंपरा, आस्था, भौगोलिक निवास, सामुदायिक रहन-सहन आदि चारित्रिक विशेषता के कारण भारतीय संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन धर्म बदलने से जनजाति की यह विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान समाप्त हो जाती है.लेकिन अपना धर्म बदलने वाले लोग भी आरक्षण का लाभ ले रहे है.जनजातीय समुदाय का यह मांग है कि धर्म बदलने वाले लोगों को आरक्षण के सूची से बाहर किया जाये.
