राजेश सिंह, जयनगर : झारखंड सरकार और पारा शिक्षक दोनों अपनी जिद्द पर अड़े है. इसका खामियाजा अभिभावकों व विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है. सरकार द्वारा पारा शिक्षकों की मांगें मांगने के बजाय उन्हें बर्खास्त करने की कार्रवाई चल रही है. पारा शिक्षकों के साथ-साथ राजद, कांग्रेस, झाविमो, झामुमो, माले, भाकपा, बसपा, सपा के साथ-साथ उसकी सहयोगी पार्टी आजसू भी इस मामले में सरकार को निशाने पर ले रखा है.
इधर, वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर विभिन्न विद्यालयों में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति तो की जा रही है, मगर पारा शिक्षकों के विरोध के भय से प्रतिनियुक्त शिक्षक अपने प्रतिनियुक्त विद्यालय में नहीं पहुंच रहे है और विद्यार्थी विद्यालय जाकर बगैर पढ़े-लिखे अथवा खेलकूद कर घर वापस जा रहे है. यहीं हाल उत्क्रमित उच्च विद्यालय गोदखर का है, जो पहले से ही शिक्षकों के अभाव से जूझ रहे थे.
विभाग ने एक शिक्षक प्रतिनियुक्त किया है, मगर उक्त शिक्षक के विद्यालय नहीं पहुंचने से विद्यालय के मुख्य द्वार व कार्यालय व वर्ग कक्ष तो मंगलवार को खुला देखा गया. विद्यार्थी भी पहुंचे मगर शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई नहीं हुई. इस दौरान छात्राएं शिक्षक का इंतजार कर लौट गयी और छात्र स्कूल के बाहर गिल्ली डंडा खेलते नजर आये, अभिभावकों में इस बात को लेकर रोष है.
सरकार के सहयोगी आजसू के युवा नेता नीरज वर्णवाल ने बाधित शिक्षा व्यवस्था के लिए सरकार को जिम्मेवार ठहराते हुए कहा है कि यह स्कूल पहले भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहा था. अब पारा शिक्षकों की हड़ताल के बाद प्रतिनियुक्त शिक्षक के नहीं आने से पठन-पाठन ठप हो गया है. मध्य विद्यालय में कुल 212 विद्यार्थियों पर सात पारा शिक्षक थे. वर्ग नौ में 73 व 10 में 46 विद्यार्थी है. सरकारी शिक्षक पहले से भी एक भी नहीं थे. विद्यालय से गोदखर, महुआटांड़, गम्हरबाद, पहाड़पुर, खेसकरी, कटहाडीह समेत कई गांव लाभान्वित होते है.
सरकार का बल प्रयोग अनुचित : श्यामदेव : पारा शिक्षकों के मामले में सरकार का रवैया अनुचित है. पहले इन पर बल प्रयोग, फिर गिरफ्तार किया गया और अब उन्हें बर्खास्त करने की कार्रवाई चल रही है.
उक्त बातें माले राज्य कमेटी सदस्य श्यामदेव यादव ने कही. कहा कि सरकार का यह रवैया लोकतंत्र के लिए घातक है. सरकार को इनकी वाजिब मांगें मान लेनी चाहिए. अगर मांगें नहीं मानी गयी, तो लोकतंत्र विरोधी इस सरकार को आगामी चुनाव में उखाड़ फेंका जायेगा. यह सरकार दलित, अल्पसंख्यक, किसान, गरीब व मजदूर विरोधी है. इस पर से जनता का विश्वास उठ गया है.
पूरे राज्य में पारा शिक्षक, मनरेगा कर्मी, मध्याह्न भोजन रसोइया व राजस्व कर्मी हड़ताल पर है. इसके लिए सरकार जिम्मेवार है. कहा कि 28 नवंबर को झुमरीतिलैया में उनके समर्थन में मुख्यमंत्री माफी मांगों मार्च आयोजित किया गया है. इसमें माले विधायक राजकुमार यादव व पूर्व विधायक विनोद सिंह भी भाग लेंगे.
