मेदिनीनगर : डीआरडीए के जलछाजन परियोजना के तकनीकी प्रबंधक सुधीर कुमार रोशन की हत्या चैनपुर पूर्वी के जिला परिषद सदस्य शैलेंद्र कुमार उर्फ शैलू ने शूटर के माध्यम से करायी थी. तकनीकी प्रबंधक सुधीर की हत्या का मामला 50 हजार रुपये में सेट किया गया था.
जिप सदस्य ने शूटर को कहा था कि काम तमाम कर देना है.
कहीं कुछ नहीं होगा. सारा कुछ हम मैनेज करेंगे और काम हो जाने के बाद 50 हजार रुपया उपलब्ध करायेंगे. उसके बाद दो शूटरों ने मिल कर सुधीर की हत्या की. इसमें साजिशकर्ता शैलेंद्र कुमार शैलू व शूटर जितेंद्र कुमार सिंह को पुलिस ने पकड़ा है, जबकि एक फरार है. उसकी गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस छापामारी कर रही है.
मंगलवार को प्रेस कांन्फ्रेंस में पलामू पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत माहथा ने इस पूरे मामले का खुलासा किया. डीआरडीए के जल छाजन परियोजना के तकनीकी प्रबंधक सुधीर कुमार उर्फ रोशन 26 अक्तूबर की सुबह करीब 7:45 बजे अपनी मोटरसाइकिल से बच्चों को बेलवाटिका स्टोपेज पर छोड़ने के बाद वापस लौट रहा था. इसी दौरान नावाटोली में नवकेतन सिनेमा के पीछे घात लगाये बैठे अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.
इस मामले में मृतक सुधीर के पिता चिबहाल राम के बयान के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था, जिसमें कृष्णा राम चंद्रवंशी, हंसा कुमारी, नेहा कुमारी, शैलेंद्र कुमार उर्फ शैलू व निशा देवी शामिल है. एसपी श्री माहथा ने बताया कि मामला दर्ज होने के बाद जिप सदस्य शैलेंद्र को पुलिस ने हिरासत में लिया था. लेकिन उस वक्त उसने घटना में अपना हाथ होने से इंकार किया था. चूंकि पुलिस के पास उस समय शैलेंद्र के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं था.
इसलिए उसे छोड़ दिया गया था. लेकिन उसकी गतिविधियों पर पुलिस निगरानी रख रही थी. इसी दौरान सीसीटीवी के फुटेज के आधार पर जब अपराधी जितेंद्र सिंह को पकड़ा गया, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ. उसने बताया कि सुधीर कुमार रोशन जिस घर में रहते थे, उसके बगल में जिप सदस्य शैलू का ससुराल है. दोनों पड़ोसियों के बीच विवाद चल रहा था.
अपराधी जितेंद्र सिंह का भी शैलू के ससुराल में आना जाना होता था. पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत माहथा के मुताबिक शैलू की एक साली के साथ जितेंद्र का अफेयर भी था. इसलिए जब शैलू ने जितेंद्र के सामने यह प्रस्ताव रखा, तो वह इसके लिए तैयार हो गया. तय योजना के मुताबिक शैलू, जितेंद्र और एक अन्य अपराधी आशीष कुमार उर्फ नमी साथ में चैनपुर थाना क्षेत्र के सेमरटांड़ में बैठे थे और वही रणनीति तय की गयी थी.
बताया गया था कि प्रतिदिन सुधीर अपने बच्चों को स्कूल के बस स्टॉपेज तक छोड़ने आता है और वह बुलेट से चलता है. इसके बाद 26 अक्तूबर को दोनों अपराधी जितेंद्र व आशीष एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर आये. नमी ने जितेंद्र को पहचान करायी. उसके बाद जब सुधीर लौट रहे थे, तो जितेंद्र ने उसे लक्ष्य कर गोली मार दी. गोली मारने के बाद दोनों अपराधी कोयल पुल होते हुए सेमरटांड़ चले गये.
हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद
पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत माहथा ने बताया कि तीन अक्तूबर को साइबर थाना के पास आयुष कुमार की जो हत्या हुई थी, उस घटना में भी शूटर जितेंद्र का ही हाथ था. आयुष की हत्या उसने चंदन के कहने पर की थी और जबकि सुधीर रोशन की हत्या जिप सदस्य शैलेंद्र कुमार शैलू के कहने पर की थी.
दोनों घटना में एक ही पिस्तौल का प्रयोग किया गया था. पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार को बरामद कर लिया है. पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत माहथा ने बताया कि तकनीकी प्रबंधक सुधीर कुमार रोशन की हत्या के बाद इस पूरे मामले की उदभेदन के लिए टीम का गठन किया गया था. इस टीम में पुलिस उपाधीक्षक प्रेमनाथ, पुलिस निरीक्षक तरुण कुमार, पुलिस निरीक्षक आनंद कुमार मिश्रा, सदर थाना प्रभारी ममता कुमारी, सतबरवा थाना प्रभारी राणा जंगबहादुर सिंह, महिला थाना प्रभारी दुलर चौड़े, प्रमोद कुमार सिंह शामिल थे.
