पांच करोड़ से बना स्कूल, छात्राओं के भविष्य पर लटका ताला

आजतक नहीं खुला लिट्टीपाड़ा प्रखंड का आदिम जनजाति पहाड़िया बालिका विद्यालय

लिट्टीपाड़ा प्रखंड में बना आदिम जनजाति पहाड़िया बालिका विद्यालय प्रतिनिधि, लिट्टीपाड़ा लिट्टीपाड़ा प्रखंड में आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से लगभग पांच वर्ष पूर्व आदिम जनजाति पहाड़िया बालिका आवासीय विद्यालय का निर्माण कराया गया था. यह विद्यालय धुंधापहाड़ी गांव के समीप लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया, लेकिन आज तक इसका संचालन शुरू नहीं हो पाया है.वर्तमान स्थिति यह है कि विद्यालय भवन और छात्रावास में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद पठन-पाठन कार्य शुरू नहीं हुआ है. इसके चलते क्षेत्र के पहाड़िया समुदाय में भारी नाराजगी देखी जा रही है. विद्यालय में लगभग 200 छात्राओं के रहने की व्यवस्था है, परंतु विद्यालय बंद रहने के कारण स्थानीय आदिम जनजाति समाज के बच्चों को शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार इस विद्यालय का संचालन शुरू करे, तो इससे आदिम जनजाति के बच्चों की शिक्षा में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है और उनके भविष्य की दिशा व दशा बदल सकती है. विद्यालय का निर्माण होने के बाद से इसकी देखरेख न होने के कारण यह भवन अब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. असामाजिक तत्वों द्वारा विद्यालय के मुख्य गेट, लोहे की खिड़कियां और दरवाजे उखाड़ कर बेचने की घटनाएं सामने आई हैं. भवन की सुरक्षा और देखभाल के लिए कोई कर्मचारी तैनात न होने की वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति की जाती, तो न केवल भवन का संरक्षण हो पाता, बल्कि असामाजिक गतिविधियों पर भी रोक लगाई जा सकती थी.

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