पाकुड़ : पाकुड़ गुरुद्वारा में शनिवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. सुबह से ही गुरुद्वारा साहिब गुरु की बाणी और कीर्तन से गूंजता रहा. बड़ी संख्या में संगत ने गुरुद्वारा पहुंचकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष माथा टेका और गुरु की बाणी का श्रवण किया. गुरुद्वारा पाठी सरदार नवनीत सिंह ने सुबह से पाठ एवं कीर्तन किया. इसके बाद अरदास की गयी, जिसमें संगत ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया और गुरु का प्रसाद ग्रहण किया. उत्सव के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए लंगर प्रसाद की व्यवस्था की गयी.
1604 में हुआ था आदि ग्रंथ का पहला प्रकाश
सिख इतिहास में पहले प्रकाश उत्सव का विशेष महत्व है. सिख परंपरा के अनुसार वर्ष 1604 में पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी ने आदि ग्रंथ का संकलन करवाकर श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर में उसका पहला प्रकाश कराया था. बाबा बुड्ढा साहिब जी को प्रथम ग्रंथी की सेवा सौंपी गयी थी. इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में पहला प्रकाश उत्सव मनाया जाता है. बाद में दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने वर्ष 1708 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को गुरु पद प्रदान किया.
कमेटी सदस्यों ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी
उत्सव के आयोजन और गुरुद्वारा प्रबंधन में प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही. कमेटी में प्रधान रोमी सिंह, कोषाध्यक्ष कुलदीप सिंह और सह-कोषाध्यक्ष निखिल बहलानी को जिम्मेदारी सौंपी गयी है. गुरुद्वारा पाठी सरदार नवनीत सिंह के अलावा सदस्य राजा सिंह, विशु और टिंकू सहित महिला सदस्यों ने भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभायी.
सेवा, समानता और मानवता का लिया संकल्प
उत्सव के दौरान संगत ने गुरु की बाणी को अपने जीवन में उतारने तथा सेवा, समानता और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया. संगत ने एक साथ बैठकर लंगर प्रसाद भी ग्रहण किया. इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और श्रद्धा का माहौल रहा.
