बीएड की मान्यता रद्द होने से युवाओं के भविष्य पर असर

बीएड की मान्यता रद्द होने से युवाओं के भविष्य पर असर

प्रभात संवाद कार्यक्रम में छात्रों ने शिक्षा के रखे मुद्दे

राघव मिश्रा, पाकुड़. शहर के छोटी अलीगंज स्थित खदानपाड़ा में रविवार को प्रभात संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए. कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों ने वर्तमान उच्च शिक्षा व्यवस्था के प्रति कई स्तरों पर नाराजगी व्यक्त की. मुख्य रूप से बीएड कॉलेज की मान्यता रद्द होने, शिक्षा की गुणवत्ता में कमी, और उच्च शिक्षा संस्थानों में बुनियादी ढांचे की कमी जैसे मुद्दों पर चिंता जताई. छात्रों ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान है. खुशी की बात है कि देश के युवा भारत को खुशहाल और बेहतर बनाने की दिशा में सोच रहे हैं, लेकिन कुछ कारणों से ऐसा नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि पाकुड़ जैसे पिछड़े और जनजातीय बहुल क्षेत्र में उच्च शिक्षा युवाओं की उम्मीद का केंद्र है. यहाँ के विद्यार्थी सीमित संसाधनों में भी बीएड की पढ़ाई कर शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं. अब मान्यता रद्द होने से न केवल उनका सत्र प्रभावित हुआ है, बल्कि शिक्षण सेवाओं में भागीदारी की संभावनाएं भी खत्म हो रही हैं. इसका असर स्थानीय छात्रों पर पड़ रहा है और उनका बीएड का सपना अधूरा नजर आ रहा है. निजी कॉलेजों में अधिक शुल्क होने के कारण छात्रों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है. सरकार को इस दिशा में पहल करनी चाहिए. बताया गया कि सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं को होगी, जो सीमित संसाधनों में अपने लक्ष्य को पूरा करना चाहती हैं. उनका सपना अधूरा रह जाएगा और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना काफी मुश्किल होगा. बताया गया कि यदि इसमें सुधार नहीं होता है तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इसके खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी और किसी भी कीमत पर छात्रों के भविष्य को अंधकार में नहीं जाने दिया जाएगा.

कहतें हैं छात्र

बीएड की मान्यता रद्द होने से मध्यम वर्गीय परिवार के छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा. छात्र-छात्राओं के अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा. विश्वविद्यालय को इस पर पहल करना चाहिए.

हर्ष भगत

पाकुड़ शिक्षा के क्षेत्र में बहुत पीछे है. यह जानते हुए भी पाकुड़ में बीएड की मान्यता रद्द कर दी गई है. इसका असर ऐसे छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा जो अपने सपने को लेकर उड़ान भरने की तैयारी में थे.

शानू रजक

सरकार की उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत है. पाकुड़ केकेएम कॉलेज में पीजी तक की पढ़ाई प्रारंभ नहीं हुई है. 100 किलोमीटर दूर जाकर छात्र-छात्राएं पीजी की पढ़ाई कर रहे हैं, यह दुर्भाग्य की बात है.

सुमित पांडे

पाकुड़ जैसे पिछड़े और जनजाति बहुल क्षेत्र में उच्च शिक्षा की उम्मीद युवाओं का केंद्र रहा है. लेकिन उनके सपने पर पानी फिरता दिख रहा है. बीएड की मान्यता रद्द होने से कई प्रकार की समस्याएं हाेंगी.

आर्गो कुमार

5.बीएड की मान्यता रद्द होने से मध्यम वर्गीय परिवार के छात्र छात्रों पर काफी असर पड़ेगा. इस मंहगाई में उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ेगा. ऐसे में छात्र-छात्राओं के सपने अधूरे रह सकते हैं.

आदित्य उपाध्याय

सबसे खुशी की बात तो यह है कि आज के नौजवान देश की उच्च शिक्षा प्रणाली में अपनी भूमिका निभा रहे हैं. लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

प्रकाश उपाध्याय

कॉलेज में लंबे समय से शिक्षकों का अभाव रहा है. इसे सिर्फ छात्र-छात्राओं की पढ़ाई तो बाधित हो रही है. पढ़ाई के साथ-साथ उनके सपने भी अधूरे रह रहे हैं. इस दिशा में विश्वविद्यालय प्रशासन को पहल करनी चाहिए.

ऋषिकेश साव

कॉलेज में अगर बीएड की पढ़ाई शुरू नहीं होती है तो हजारों छात्रों की उम्मीद को ऊंची उड़ान नहीं मिल पायेगी. छात्र-छात्राओं के सपने अधूरे रह जायेंगे. इसका सबसे ज्यादा असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ेगा. राज चौधरी

उच्च शिक्षा प्रणाली में कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. शिक्षा व्यवस्था ही ऐसी चीज है जो कि हमारे देश और समाज को बदल सकती है. सरकार ने वर्तमान में कई कॉलेज के बीएड की मान्यता को रद्द कर दिया है.

तन्मय पांडे

शिक्षा से ही देश के विकास की नीव संजोई जा सकती है. यदि शिक्षा व्यवस्था ही दुरुस्त नहीं होगी तो हमारा देश में एक शिक्षित सामाज का विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है. शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है.

मनीष भगत

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Author: RAGHAV MISHRA

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