पिछले साल मार्च में पुल कंस्ट्रक्शन कंपनी कर्मियों के साथ की थी मारपीट
पंप सेट, मिक्चर मशीन व पानी टैंकर में लगायी थी आग
पोस्टर साटकर नक्सली वारदात होने का दे देता था रूप
पाकुड़ : पुलिस निरीक्षक की हत्या, लूट व रंगदारी जैसे घटनाओं को अंजाम दे चुके, पुलिस के हत्थे चढ़े मोस्ट वांटेड सनातन मड़ैया उर्फ विगी मड़ैया नक्सल का नाम बेचने का काम करता था. विगत 9 मार्च 2016 को पाकुड़ जिला के अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत पचुवाड़ा में एक बड़ा पुल का निर्माण करा रहे कंस्ट्रक्शन कंपनी को निशाना बनाते हुए इन्होंने अपने सहयोगियों के साथ देर रात्रि निर्माणाधीन स्थल पर कैंप में सो रहे कंपनी के कर्मियों के साथ मारपीट की थी और घटना को नक्सली रूप देने के लिए वहां पड़े पंपिंग सेट, साइकिल, मिक्चर मशीन, पानी टैंकर सहित अन्य सामानों में आग लगा दिया था.
इतना ही नहीं उस क्षेत्र में दहशत फैलाने के लिए घटना के बाद नक्सली संगठन होने का संकेत देते हुए पुल निर्माण स्थल पर पोस्टर भी साटा था. चूंकि जिले के अमड़ापाड़ा, लिट्टीपाड़ा व पाकुड़िया थाना क्षेत्र शुरू से ही नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है, इसी का फायदा उठाते हुए इन्होंने पुलिस निरीक्षक की हत्या मामले में सजा काट कर जेल से बाहर आने के बाद गिरोह तैयार किया था और ज्यादातर सदस्यों को इसी क्षेत्र से शामिल किया था. बहरहाल एसपी अजय लिंडा के निर्देश पर एसडीपीओ संतोष कुमार की टीम ने छापेमारी कर कुख्यात अपराधी सनातन को गिरफ्तार किये जाने के बाद पुलिस ने जहां राहत की सांस ली है, वहीं नक्सल प्रभावित क्षेत्र में अन्य विकास कार्य से जुड़े संवेदकों ने भी राहत महसूस किया है.
छापेमारी दल के अधिकारी व पुलिस कर्मी होंगे सम्मानित
सनातन मड़ैया की गिरफ्तारी को लेकर एसपी अजय लिंडा के निर्देश पर गठित छापेमारी टीम को सम्मानित किया जायेगा. एसपी श्री लिंडा ने कहा है कि छापेमारी टीम ने बारीकी दिखाते हुए लंबे समय से पुलिस के गिरफ्त से फरार चल रहे कुख्यात अपराधी सनातन की गिरफ्तारी की है. छापेमारी दल में एसडीपीओ संतोष कुमार, पुलिस निरीक्षक अमड़ापाड़ा प्रभाग अजीत कुमार कुजूर, पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी अमड़ापाड़ा सहदेव टोप्पो व मुफस्सिल थाना प्रभारी लव कुमार शामिल थे.
क्या कहते हैं एसपी
एसपी अजय लिंडा ने कहा कि सनातन मड़ैया का नक्सल संगठन से कोई लेना-देना नहीं है. यह एक कुख्यात अपराध कर्मी है. वर्ष 2001 में सड़क लूट के समय एक पुलिस निरीक्षक की इन्होंने हत्या कर दी थी, जिसमें उसे सजा भी हुई थी. सजा काट कर बाहर आने के बाद नया गिरोह तैयार कर रंगदारी व लूट की घटना को अंजाम देते थे.
