जनवरी से नवंबर तक 11 महीने में हुई 64 सड़क दुर्घटनाएं, 60 की मौत व 19 गंभीर रूप से घायल

पाकुड़ से गुजरने वाली एनएच-333 ए पर बने छोटे-छोटे गड्ढे राहगीरों के लिए मुसीबत बनती जा रही है.

पाकुड़ से गुजरने वाली एनएच-333 ए पर बने गड्ढे राहगीरों के लिए आफत

राघव मिश्रा, पाकुड़

पाकुड़ से गुजरने वाली एनएच-333 ए पर बने छोटे-छोटे गड्ढे राहगीरों के लिए मुसीबत बनती जा रही है. सड़क पर मौजूद गड्ढे न केवल यातायात को प्रभावित कर रहा है, बल्कि वाहन चालकों और यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में है. वाहन चालक इन गड्ढों से बचने के लिए अपने वाहनों को दाएं-बाएं से निकालने की कोशिश करते हैं. सबसे बड़ी समस्या पीछे आ रहे वाहनों को हो रही है. पीछे से आ रहे वाहन चालकों को यह पता ही नहीं चल पा रहा है कि आगे वाले वाहन किस ओर जायेगा. ऐसी स्थिति में बड़ी दुर्घटना की आशंका जताई जा रही है. यही नहीं इन गड्ढों से वाहन मालिकों को भी काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. बड़े छोटे वाहन मालिकों की माने तो इन गड्ढों से टायर फटने का डर रहता है. हादसे का डर ज्यादा है.

पाकुड़ से सोनाजोड़ी के बीच मिलेंगे दर्जनों गड्ढे

एनएच 333 ए पाकुड़ से सोनाजोड़ी के बीच देखा जाए तो दर्जनों से अधिक गड्ढे दिख जाएंगे. यह गड्ढे यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है. रात के अंधेरों में इन गड्ढों पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. वहीं बड़े वाहनों से ठोकर खाने की भी ज्यादा संभावना रहती है. ऐसा इसलिए क्योंकि वाहन चालक अपने वाहन को बचाने के लिए समतल सड़क की ओर जाने का प्रयास करते हैं. बता दें कि यह गड्डा-दुमका जैसे शहरों को जोड़ने का मुख्य मार्ग है. इन मुख्य मार्ग पर प्रत्येक दिन हजारों वाहनों का आवागमन होता है. लेकिन यह गड्ढे यात्रियों के लिए मुसीबत बनती जा रही है. जनवरी से लेकर नवंबर तक में 64 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 60 की मौत परिवहन विभाग ने दर्ज किया है. वहीं 19 गंभीर रूप से घायल हुए हैं. यात्रियों की माने तो जब आवागमन के लिए सड़क दुरुस्त नहीं होगी तब तक सड़क दुर्घटना में इजाफा होता रहेगा. सड़क पर बने गड्ढे को दुरुस्त किया जाना अति आवश्यक है. इस विभाग के संबंधित अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए.

कहते हैं अधिकारी

सड़क बनने का कार्य चल रहा है. पाकुड़ तक पहुंचने में समय लगेगा. यात्रियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो इसे ध्यान में रखते हुए सड़क पर छोटे-मोटे गड्ढों को शीघ्र करवा दिया जायेगा.

-रविकांत मांझी, ईई, राष्ट्रीय पथ निर्माण विभाग

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Author: RAGHAV MISHRA

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