– मामला संग्रामपुर गांव में बढ़ रहे डेंगू मरीजों का
– सौ से अधिक लोग हो चुके हैं पीड़ित – भागलपुर में करा रहे इलाज
पाकुड़ : सदर प्रखंड के संग्रामपुर गांव के लोगों का पाकुड़ जिले के स्वास्थ्य महकमा से विश्वास उठ चुका है. डेंगू के लक्षण मिलने के बाद संग्रामपुर विश्वास टोला, रानीपुर, कुमारपुर आदि गांवों के दर्जनों मरीज बिहार के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज भागलपुर में भरती हो चुके हैं. पिछले एक माह से गांव में डेंगू फैले जाने को लेकर दहशत का माहौल है. वहीं जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग या किसी जनप्रतिनिधि द्वारा कोई ठोस कदम अबतक नहीं उठाया गया है. इसे लेकर ग्रामीणों में इनके प्रति काफी आक्रोश भी है.
डेंगू किट की नहीं है व्यवस्था
ग्रामीण हबीबुर रहमान, शेर मोहम्मद, अख्तारूल शेख, जकारूल शेख, सहीदुल शेख सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि पाकुड़ सदर अस्पताल सोनाजोड़ी में डेंगू किट की व्यवस्था नहीं है. केवल वायरल फीवर बता कर उन्हें छोड़ दिया जाता है. प्राइवेट चिकित्सा संस्थानों में 700 रुपये में किट खरीद कर जब जांच कराया जाता है तो डेंगू का मरीज पाया जाता है. ग्रामीणों का आरोप है कि न तो जनप्रतिनिधि ही इस ओर ध्यान दे रहे हैं और न ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा ही कोई ठोस पहल की जा रही है. ग्रामीणों के मुताबिक अब तक सौ से भी अधिक लोग यहां डेंगू के शिकार हो चुके हैं.
फॉगिंग मशीन का उपयोग नहीं
ग्रामीणों के मुताबिक नगर परिषद पाकुड़ में फॉगिंग मशीन की व्यवस्था होने के बावजूद जिला प्रशासन द्वारा अब तक संग्रामपुर व आसपास के क्षेत्र में छिड़काव किये जाने को लेकर कोई पहल नहीं की गई है. ग्रामीणों ने डेंगू जोन बनते जा रहे संग्रामपुर गांव में फॉगिंग मशीन से स्प्रे करने की मांग की है.
जांच के नाम पर महज खानापूर्ति
गांव में डेंगू की समस्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य शिविर के नाम पर महज खानापूर्ति की गई. ग्रामीणों के मुताबिक जिस गति से उपरोक्त क्षेत्र में स्वास्थ्य टीम द्वारा सुविधा मुहैया कराया जाना चाहिए, वह नहीं कराया गया है.
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में अनिकुल आलम, राजीव विश्वास, काजी नईमुद्दीन, मासुदा बीबी, जियारूद्दीन शेख, अख्तारूल शेख, कामरूल बीबी, साबीमा खातून, माउनजारा बीबी, आबुल हसन, फरीदा बीबी, इमामुद्दीन शेख, मजहर खातून, मुमताज सहित काफी संख्या में लोग अब भी डेंगू के लक्षण से पीडि़त हैं. अधिकांश लोगों का इलाज भागलपुर में चल रहा है.
क्या कहते हैं सीएस
सिविल सर्जन डॉ प्रवीण कुमार राम का कहना है िक वैसे मरीज जिसका प्लेटलेट कम पाया जाता है उसी की डेंगू किट से जांच की जाती है. जहां तक संग्रामपुर गांव की बात है यहां मूल रूप से वायरल फीवर, मियादी, टाइफायड आदि से लोग पीड़ित हैं. पाकुड़ में इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं हैं. केवल डेंगू वार्ड में भर्ती हो जाने से ही वे डेंगू के मरीज नहीं होते हैं.
डेंगू किट है या नहीं, कराएंगे जांच
डीसी का कहना है िक मामले को लेकर उन्हें जानकारी नहीं है. अस्पताल में डेंगू किट पर्याप्त मात्रा में होना चाहिए. यदि ऐसा नहीं है तो इसकी जांच की जायेगी. सभी को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करायी जायेगी.
