महेशपुर : ग्रामीण क्षेत्र के गरीब बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए जहां सरकार द्वारा बाल विकास परियोजना कार्यालय के माध्यम से चलने वाले आंगनबाड़ी केद्रों में रेडी- टू- इट पोषाहार के पैकेट दिये जाने की महत्वपूर्ण योजना चला रही है. किशोरी व गर्भवती महिलाओं को भी पोषक पोषाहार देने की व्यवस्था की गयी […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
महेशपुर : ग्रामीण क्षेत्र के गरीब बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए जहां सरकार द्वारा बाल विकास परियोजना कार्यालय के माध्यम से चलने वाले आंगनबाड़ी केद्रों में रेडी- टू- इट पोषाहार के पैकेट दिये जाने की महत्वपूर्ण योजना चला रही है. किशोरी व गर्भवती महिलाओं को भी पोषक पोषाहार देने की व्यवस्था की गयी है. वहीं पाकुड़ जिले के उपायुक्त दिलीप कुमार झा सरकारी योजनाओं का लाभ संबंधित योग्य लाभुकों को पूर्ण व निर्धारित मात्रा में देने के लिए प्रयास कर रहे हैं.
पर महेशपुर प्रखंड की कुछ आंगनबाड़ी सेविका/सहायिकाओं द्वारा मनमानी कार्यशैली के कारण योजना बाधक बन रही है. इस बात का उदाहरण महेशपुर प्रखंड के तेलियापोखर पंचायत अंतर्गत तेलियापोखर आंगनबाड़ी केंद्र-वन से थोड़ी दूर रसियागोरा खेत के समीप झाड़ी में फेंका गया पोषाहार है. आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों व गर्भवती महिलाओं को दिये जाने वाले रेडी- टू- इट पोषाहार का पैकेट पाया गया है. छह पैकेट झाड़ी में तथा दो पैकेट पास के ही गढ़े में जमा पानी में फेंका हुआ पाया गया.
मौके पर उपस्थित तेलियापोखर ग्राम प्रधान जुलियस मुर्मू ने फेंके गये पैकेट को दिखाते हुए बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों व गर्भवती महिलाओं को दिया जाने वाला पैकेट झाड़ी व गढ़े में फेंका जाना सेविका व साहिकाओं की लापरवाही को दर्शाता है.
सच जानने को लेकर जब प्रभात खबर संवाददाता आंगनबाड़ी केंद्र तेलियापोखर-वन पहुंचा तो केंद्र की सहायिका बेरोनिका सोरेन नौ बच्चों के साथ मौजूद थीं. उससे फेंकें गये पैकेट के बाबत जानकारी लेने पर उसने बताया कि इस बारे में उसे कुछ पता नहीं है. क्योंकि पोषाहार का वितरण केंद्र की सेविका पुष्पलता टुड्डू स्वयं करती हैं. सेविका के बारे में पूछे जाने पर सहायिका बेरोनिका सोरेन ने बताया कि वह 17/11/17 से 20/11/17 तक अवकाश ली है. केंद्र में सुबह करीब साढ़े नौ बजे तक नौ बच्चे उपस्थित थे. नामांकित बच्चों की संख्या, सहायिका बेरोनिका सोरेन द्वारा 30 बताया गया. शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों को केंद्र में दिये जाने वाले खिचड़ी के बाबत पूछे जाने पर सहायिका बेरोनिका सोरेन ने बताया कि केंद्र की सेविका पुष्पलता टुड्डू द्वारा तीन दिनों के लिए मात्र दो किलो चावल, 100 ग्राम सोयाबीन बड़ी तथा करीब 25 से 30 ग्राम दाल ही उपलब्ध कराया गया है.
वन सेविका की कार्यशैली से ग्रामीणों में रोष
उक्त आंगनबाड़ी केंद्र में लाभुक बच्चों की उपस्थित अभिभावक मनोज मुर्मू, शिवधन हेंब्रम, बाबूधन हेंब्रम, पीरीसबेला मरांडी, रमेश मुर्मू, शर्मिला मरांडी आदि ने बताया कि केंद्र की सेविका पुष्पलता टुड्डू द्वारा केंद्र का संचालन नियमित व निर्धारित समय एवं मात्रा की बजाय मनमाने ढंग से किया जाता है. इसकी लिखित शिकायत अभिभावकों व ग्रामीणों ने उपायुक्त व सीडीपीओ से करने को कही है. यहां सवाल उठता है कि फेंके गये पैकेट, एक्सपायरी हो. पर जब बच्चों की संख्या के अनुसार पोषाहार का पैकेट कार्यालय द्वारा केंद्र को उपलब्ध कराया जाता है तो फिर पैकेट कैसे बचे? बताते चले कि फेंकें गये पैकेटों पर पैकेजिंग की तिथि एक नवंबर- 2017 अंकित है. उपयोग का समय बनने के तीन माह के अंदर तक दर्शाया गया है.
पूर्व में भी ग्रामीणों ने नियमित केंद्र संचालन नहीं होने पर सीडीपीओ व डीसी से की थी शिकायत