PM Modi @ 76: वडनगर से प्रधानमंत्री तक, सेवा और संकल्प की वह यात्रा जिसने बदली राजनीति की तस्वीर

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है. वडनगर से शुरू हुई उनकी सार्वजनिक जीवन की यात्रा गुजरात के मुख्यमंत्री पद से होते हुए देश के प्रधानमंत्री के तीसरे कार्यकाल तक पहुंची. इस यात्रा को उनके समर्थक सेवा, संगठन और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प से जोड़कर देखते हैं.

कुछ यात्राएं केवल एक व्यक्ति की नहीं होतीं. वे अपने समय, राजनीति और समाज के बदलते सवालों के साथ आगे बढ़ती हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सार्वजनिक जीवन भी भारतीय राजनीति की ऐसी ही लंबी यात्राओं में शामिल है.

17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी का शुरुआती जीवन एक साधारण परिवार में बीता. प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, वडनगर की गलियों से शुरू हुई उनकी यात्रा आगे चलकर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंची.

वडनगर से संगठन की राजनीति तक

नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में संगठन की भूमिका शुरुआती दौर से महत्वपूर्ण रही. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और बाद में भारतीय जनता पार्टी के संगठन में काम किया. गुजरात की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वे 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने और 2014 तक इस पद पर रहे.

यहीं से उनकी राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका तेजी से बढ़ी. 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 26 मई 2014 को उन्होंने पहली बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.

इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें दूसरा कार्यकाल मिला और 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. 9 जून 2024 को राष्ट्रपति भवन में उन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.

BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

12 साल की प्रधानमंत्री यात्रा और एक नया रिकॉर्ड

2026 नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा. 10 जून 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रस्ताव के अनुसार, नरेंद्र मोदी लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे कर देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने. इस मामले में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा.

यह उपलब्धि उनके समर्थकों के लिए राजनीतिक निरंतरता का प्रतीक है, जबकि भारतीय राजनीति के विश्लेषण में इसे लंबे समय तक बने जनादेश और बदलते राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में देखा जाता है.

योजनाओं से शासन की तस्वीर बदलने का प्रयास

मोदी सरकार के वर्षों में सामाजिक कल्याण और वित्तीय समावेशन से जुड़ी कई योजनाएं बड़े पैमाने पर लागू हुईं.

प्रधानमंत्री जन-धन योजना इसका एक प्रमुख उदाहरण है. अगस्त 2026 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 59 करोड़ से अधिक जन-धन खाते खोले जा चुके थे. इनमें लगभग 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम हैं और करीब 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं.

इसी तरह मुद्रा योजना के तहत जून 2026 तक 59.14 करोड़ ऋण स्वीकृत किए जाने की जानकारी सरकार ने दी है. इन ऋणों की कुल राशि 41.71 लाख करोड़ रुपये बताई गई है.

जल जीवन मिशन के आंकड़े भी इस बदलाव के पैमाने को दिखाते हैं. जुलाई 2026 तक करीब 15.89 करोड़ ग्रामीण परिवारों को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध होने की जानकारी दी गई. अगस्त 2019 में यह संख्या 3.23 करोड़ थी.

इन आंकड़ों के साथ यह समझना भी जरूरी है कि कई योजनाओं का क्रियान्वयन केंद्र और राज्य सरकारों के साझा प्रयास से होता है. उदाहरण के लिए, जल जीवन मिशन में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है.

Mrityunjay Sharma, Author and Spokesperson-BJP Jharkhand

अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप और तकनीक पर जोर

मोदी सरकार के दौर में विकास की चर्चा केवल पारंपरिक कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रही. मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों के जरिए भारत में विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उद्यमिता को बढ़ाने की कोशिश की गई.

स्टार्टअप इंडिया के तहत 31 मार्च 2026 तक 2.23 लाख से अधिक स्टार्टअप को मान्यता मिलने और इनसे 23.36 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की सरकारी जानकारी सामने आई है.

अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी भी इस दौर के महत्वपूर्ण बदलावों में शामिल रही. 2026 में सरकार ने बताया कि भारत में करीब 440 स्पेस-टेक स्टार्टअप पंजीकृत हैं. IN-SPACe के जरिए निजी कंपनियों और स्टार्टअप को अंतरिक्ष गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिला है.

'विकसित भारत' की ओर तीसरे कार्यकाल का एजेंडा

नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में 'विकसित भारत 2047' एक प्रमुख राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में सामने आया है. इसके साथ आत्मनिर्भर भारत, रोजगार, महिला नेतृत्व, तकनीकी नवाचार, बुनियादी ढांचे और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका जैसे मुद्दे जुड़े हैं.

हालांकि इन लक्ष्यों की सफलता का आकलन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि रोजगार, आय, मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय असमानताओं जैसे वास्तविक संकेतकों से किया जाएगा. यही वे क्षेत्र हैं जहां सरकार की नीतियों के प्रभाव का निरंतर मूल्यांकन जरूरी है.

भारत की वैश्विक भूमिका भी यात्रा का हिस्सा

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति में रणनीतिक साझेदारियों, प्रवासी भारतीयों और बहुपक्षीय मंचों पर सक्रियता को प्रमुखता मिली है. भारत-अमेरिका, भारत-जापान, भारत-ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के साथ संबंधों के अलावा ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका पर भी जोर दिया गया है.

इसका एक व्यापक संदर्भ यह है कि भारत आर्थिक, तकनीकी और सामरिक क्षमता के साथ वैश्विक संस्थाओं में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

17 सितंबर: जन्मदिन से आगे एक राजनीतिक यात्रा का पड़ाव

17 सितंबर इसलिए नरेंद्र मोदी के जीवन में केवल जन्मदिन की तारीख नहीं है. यह वडनगर से शुरू हुई उस सार्वजनिक यात्रा को देखने का अवसर भी है, जिसने उन्हें संगठन के कार्यकर्ता से गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर तीन बार देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचाया.

इस यात्रा को उनके समर्थक 'सेवा, संकल्प और राष्ट्र प्रथम' की राजनीति के रूप में देखते हैं. आलोचक और राजनीतिक विश्लेषक इसके अलग-अलग पहलुओं- नीतियों, उपलब्धियों, चुनौतियों और प्रभाव—का अपने-अपने नजरिए से मूल्यांकन करते रहे हैं.

लेकिन एक तथ्य निर्विवाद है कि नरेंद्र मोदी ने 2014 के बाद से भारतीय राजनीति के राष्ट्रीय विमर्श को गहराई से प्रभावित किया है और 2026 तक उनका सार्वजनिक जीवन भारतीय लोकतांत्रिक राजनीति के एक लंबे अध्याय में बदल चुका है.

लेखक: मृत्युंजय शर्मा लेखक झारखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हैं. यह लेख लेखक के विचारों पर आधारित है.

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लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, Geopolitical Analyst, UPSC Educator और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं (जैसे Pratiyogita Darpan) में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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