PM Modi @ 76: 12 साल में सफाई कर्मचारियों के लिए क्या बदला? मोदी सरकार की योजनाएं और वाल्मीकि समाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर के मौके पर जानिए पिछले 12 वर्षों में सफाई कर्मचारियों, सीवर-सेप्टिक टैंक श्रमिकों और स्वच्छता उद्यमिता से जुड़ी प्रमुख सरकारी पहलें.

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है. इस मौके पर पिछले करीब 12 वर्षों में स्वच्छता और सफाई कर्मचारियों से जुड़ी केंद्र सरकार की प्रमुख पहलों को देखना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्वच्छता का सवाल केवल साफ शहरों और गांवों तक सीमित नहीं है. इसके केंद्र में वे लाखों श्रमिक भी हैं, जो सीवर, सेप्टिक टैंक, कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

वाल्मीकि समाज का एक बड़ा हिस्सा ऐतिहासिक रूप से सफाई कार्य से जुड़ा रहा है. ऐसे में स्वच्छता क्षेत्र में बदलाव की नीतियों का इस समाज पर सीधा सामाजिक और आर्थिक असर पड़ता है.

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स्वच्छ भारत मिशन से बदली स्वच्छता की तस्वीर

2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन स्वच्छता को राष्ट्रीय अभियान के रूप में सामने लाने वाली बड़ी पहल थी. इसके शुरुआती उद्देश्यों में खुले में शौच की समाप्ति, अस्वच्छ शौचालयों का रूपांतरण, मैनुअल स्कैवेंजिंग के उन्मूलन और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे लक्ष्य शामिल थे.

इसका एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि सफाई को केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी मानने के बजाय नागरिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन से जोड़ा गया.

लेकिन स्वच्छता अभियान की सफलता का दूसरा सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है—जो लोग देश को साफ रखते हैं, उनकी सुरक्षा कितनी सुनिश्चित हुई?

Swachh Bharat Mission

सीवर सफाई में मशीनों पर जोर

इसी सवाल के जवाब में National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem यानी NAMASTE योजना सामने आई. इसका उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई में मानवीय जोखिम को कम करना, मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ाना और श्रमिकों को सुरक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना है.

योजना के तहत श्रमिकों की पहचान और प्रोफाइलिंग, सुरक्षा प्रशिक्षण, PPE किट, स्वास्थ्य कवरेज तथा स्वच्छता से जुड़े उपकरण खरीदने के लिए सहायता जैसे प्रावधान किए गए हैं.

दिसंबर 2025 तक 89,114 सीवर एवं सेप्टिक टैंक श्रमिकों का सत्यापन किया गया था. इनमें झारखंड के 1,115 श्रमिक शामिल थे. उसी आंकड़े के अनुसार 73,864 श्रमिकों को आयुष्मान भारत, राज्य स्वास्थ्य योजनाओं या NAMASTE के तहत स्वास्थ्य कवरेज मिला था.

इसके बाद आंकड़ा और बढ़ा. अगस्त 2026 में सरकार ने बताया कि NAMASTE के तहत देशभर में 89,915 श्रमिक सत्यापित किए जा चुके हैं.

झारखंड में मजदूरी से उद्यमिता की ओर रास्ता

स्वच्छता क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण विचार है—सफाई कर्मचारी केवल मजदूरी करने वाले श्रमिक न रहें, बल्कि आधुनिक स्वच्छता सेवाओं के उद्यमी भी बन सकें.

स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत सफाई कर्मचारियों और लक्षित समूहों को स्वच्छता से जुड़े वाहनों और उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया था. इसमें जेटिंग एवं सक्शन मशीन, वैक्यूम लोडर और कचरा संग्रहण जैसे उपकरण शामिल हैं.

NAMASTE के तहत भी sanitation enterprises और स्वच्छता से जुड़े उपकरणों की खरीद के लिए capital subsidy का प्रावधान रखा गया है. इसका उद्देश्य श्रमिकों और उनके आश्रितों के लिए वैकल्पिक आजीविका के रास्ते खोलना है.

Govinda Balmiki, IT Cell Convener, BJP SC Morcha, Jharkhand

स्वास्थ्य सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा

सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में संक्रमण, जहरीली गैस और अन्य व्यावसायिक जोखिम होते हैं. इसलिए सुरक्षा उपकरण और स्वास्थ्य बीमा इस क्षेत्र की नीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हैं.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 31 दिसंबर 2025 तक सत्यापित श्रमिकों में से 73,864 को विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के तहत कवरेज मिला था.

लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई

इन पहलों के बावजूद सफाई कर्मचारियों की स्थिति का आकलन केवल सरकारी योजनाओं की संख्या से नहीं किया जा सकता. स्थानीय निकायों में रोजगार की प्रकृति, संविदा व्यवस्था, वेतन, सुरक्षा मानकों का पालन और सामाजिक भेदभाव जैसी चुनौतियां अभी भी चर्चा का विषय हैं.

सरकारी आंकड़े स्वयं यह बताते हैं कि mechanisation के कारण श्रमिकों की आय में औसत वृद्धि का कोई व्यवस्थित आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं है. साथ ही, सरकार ने अभी mechanisation से productivity बढ़ने को मापने वाले स्पष्ट indicators भी निर्धारित नहीं किए हैं.

यानी अगला सवाल केवल यह नहीं है कि कितने श्रमिक योजना से जुड़े, बल्कि यह भी है कि उनकी आय, सुरक्षा और सामाजिक स्थिति में कितना वास्तविक बदलाव आया.

वाल्मीकि समाज के युवाओं के लिए अगली चुनौती

पिछले 12 वर्षों की पहलों को एक व्यापक बदलाव के रूप में देखा जा सकता है—स्वच्छता को राष्ट्रीय प्राथमिकता देने से लेकर सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता उद्यमिता तक.

अब वाल्मीकि समाज के सामने अगला अवसर शिक्षा, कौशल, सरकारी सेवा, प्रशासन, कानून और उद्यमिता में व्यापक भागीदारी बढ़ाने का है.

स्वच्छ भारत की कहानी केवल साफ सड़कों और शौचालयों की कहानी नहीं है. इसकी असली कसौटी यह भी है कि भारत को साफ रखने वाले श्रमिकों का जीवन कितना सुरक्षित, सम्मानित और आत्मनिर्भर बनता है.

झारखंड फैक्ट फाइल

  • NAMASTE के तहत झारखंड में सत्यापित श्रमिक: 1,115
  • देशभर में सत्यापित श्रमिक: 89,915 — अगस्त 2026 तक
  • दिसंबर 2025 तक राष्ट्रीय आंकड़ा: 89,114
  • NAMASTE का प्रमुख फोकस: mechanised sanitation, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा
  • स्वच्छता उद्यमिता: sanitation-related machinery और enterprises को बढ़ावा
  • स्वास्थ्य सुरक्षा: Ayushman Bharat और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ने का प्रयास

लेखक: गोविंदा बाल्मीकि, आईटी सेल संयोजक, भाजपा एससी मोर्चा, झारखंड

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लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, Geopolitical Analyst, UPSC Educator और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं (जैसे Pratiyogita Darpan) में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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