लोहरदगा: बीएस कॉलेज, लोहरदगा में शनिवार को एनएपीपीडीआर योजना के तहत मादक पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम को लेकर जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें कॉलेज के करीब 130 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करना था.
प्राचार्य डॉ शशि कुमार गुप्ता ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने की सलाह देते हुए स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि युवा देश की महत्वपूर्ण शक्ति हैं. उन्हें अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग रचनात्मक एवं सकारात्मक कार्यों में करना चाहिए.
स्टेट लेवल को-ऑर्डिनेटिंग एजेंसी (एसएलसीए), बिहार व झारखंड की ओर से प्रशिक्षक इमाम अंसारी और सर्वेश कुमार ने विद्यार्थियों को मादक पदार्थों के सेवन के कारण, इसके दुष्प्रभाव और बचाव के उपायों की जानकारी दी. उन्होंने विद्यार्थियों से खुद नशे से दूर रहने के साथ आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने की अपील की.
नशे की लत के मनोवैज्ञानिक प्रभावों की दी जानकारी
मनोविज्ञान विभाग के प्रो आनंद मांझी ने नशे के मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नशे की लत व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहार, निर्णय लेने की क्षमता तथा पारिवारिक और सामाजिक संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित करती है. उन्होंने विद्यार्थियों से नशे की शुरुआत से ही सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेने की अपील की.
कार्यक्रम के दौरान डॉ सुमन कुजूर को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया. वहीं कार्यक्रम में शामिल सभी छात्र-छात्राओं को प्रमाणपत्र प्रदान किया गया. मौके पर प्रो. शेरोन सुरिन, डॉ अर्जुन लकड़ा, डॉ संजय रविदास, प्रो सरिता कच्छप, डॉ पुष्पा, डॉ अजय नाथ, डॉ भूटान महली, डॉ सरिता, प्रो. मुकेश, डॉ मनोहर, प्रो पन्ना, प्रो सत्यनारायण, प्रो सीमा समेत अन्य शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी मौजूद थे. कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने नशे की रोकथाम को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ परिवार, शिक्षण संस्थान और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया. विद्यार्थियों ने नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया.
