दरी बुनाई केंद्र से जुड़कर महिलाएं बन रही हैं आत्मनिर्भर

सीएलएफ द्वारा संचालित दरी कालीन बुनाई के कार्य से जुड़कर पेशरार की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही है.

किस्को. सीएलएफ द्वारा संचालित दरी कालीन बुनाई के कार्य से जुड़कर पेशरार की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही है.पेशरार में संचालित दरी बुनाई केंद्र में महिलाएं डोरमैट,आसन,दरी, बनाकर स्वावलंबी बन रही है.अगर महिलाओं को बाजार की व्यवस्था कर दी जाये व दरी की मांग अच्छी खासी रहे तो बेहतर आमदनी कमाई जा सकती है. फिलहाल दरी बुनाई केंद्र में 12 महिलाएं कार्य कर रही है.महिलाएं मांग के अनुसार दरी निर्माण कार्य करती है.वहीं बनाये गये दरी को रोजगार मेला, में स्टॉल लगाकर बिक्री की जाती है.वहीं पर्यटक भी आकर बनायी गयी सामग्री भी खरीद लेते हैं.वहीं पर्यटन क्षेत्र में स्टॉल लगाकर भी बिक्री की जाती है.साथ ही दूसरे राज्यों में भी दरी की बिक्री की जाती है.महिलाओं को प्रोडक्शन के आधार पर मानदेय का भुगतान किया जाता है.बिक्री अच्छी खासी रहने पर 4 से 6 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है.महिलाओं को निर्माण कार्य के लिए छह महीने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है.

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By Prabhat khabar news desk

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