2026 में क्या लोहरदगा को इन समस्याओं से मिलेगी मुक्ति

2026 में क्या लोहरदगा को इन समस्याओं से मिलेगी मुक्ति

लोहरदगा़ वर्ष 2025 की विदाई और 2026 के स्वागत के बीच लोहरदगा जिला वासियों की आंखों में नयी उम्मीदें हैं. जिलावासियों को भरोसा है कि नया साल उनकी पुरानी समस्याओं के अंत का संदेश लेकर आयेगा. हालांकि, इसके लिए जनता जनप्रतिनिधियों की सक्रियता को अनिवार्य मान रही है. लोगों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासनिक बैठकों में अक्सर अधिकारियों को अधूरी या गलत जानकारी दी जाती है, जिससे जमीनी स्तर पर कार्य प्रभावित होते हैं. 2025 की समय सीमा पार, अधर में बाइपास : शहरवासियों को सबसे अधिक उम्मीद बाइपास सड़क के तैयार होने की है. इस प्रोजेक्ट को 2025 में ही पूर्ण होना था, लेकिन संवेदक की कार्यशैली के कारण निर्माण कछुआ गति से चल रहा है. बाइपास नहीं बनने से भारी वाहन शहर के बीच से गुजरते हैं, जिससे हर दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं. लोगों को उम्मीद है कि 2026 में उन्हें जाम, धूल और ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी. किसानों को कोल्ड स्टोरेज का इंतजार : लोहरदगा कृषि प्रधान जिला है, लेकिन यहां एक भी कोल्ड स्टोरेज संचालित नहीं है. दिलचस्प बात यह है कि कोल्ड स्टोरेज बनकर तैयार है, पर उसे चालू नहीं किया गया है. इसके अभाव में किसान अपनी मेहनत की फसल औने-पौने दामों पर बेचने को विवश हैं. किसानों को उम्मीद है कि नये साल में यह सुविधा शुरू होगी और उन्हें उनकी उपज का सही मूल्य मिल सकेगा. रेलवे : नयी ट्रेनों और बोगियों की आस : अमृत भारत योजना के तहत लोहरदगा स्टेशन का कायाकल्प तो हुआ है, लेकिन अब सुविधाओं के विस्तार की बारी है. यात्रियों को उम्मीद है कि 2026 में यहां से वाराणसी, लखनऊ, अहमदाबाद और अयोध्या के लिए सीधी ट्रेनें चलेंगी. क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली लोहरदगा-रांची मेमू ट्रेन के फेरे बढ़ाने और बोगियों की संख्या में इजाफे की भी मांग तेज है. गड्ढों में तब्दील शहर की मुख्य सड़कें : लोहरदगा शहर की मुख्य सड़कें वर्तमान में बदहाल हैं. पैदल चलना भी दूभर हो गया है. सड़क मरम्मत को लेकर न तो नगर परिषद गंभीर दिख रही है और न ही प्रशासन. जर्जर सड़कों के कारण दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं. नया साल आते-आते लोगों की यह मांग भी प्रबल हो गयी है कि कम से कम शहर की सड़कों की सूरत बदली जाये. नशे के कारोबार पर लगे अंकुश : समाज में बढ़ती विकृति और अपराध का सबसे बड़ा कारण नशा है. युवा और नाबालिग इसकी चपेट में आ रहे हैं, जिससे आपसी सौहार्द बिगड़ रहा है. जिलावासियों ने पुलिस प्रशासन से उम्मीद जतायी है कि 2026 में नशे के अवैध कारोबारियों पर कठोर कार्रवाई की जायेगी, ताकि युवा पीढ़ी को बर्बाद होने से बचाया जा सके.

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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